अजित पवार प्लेन क्रैश: 'विमान में थे दो अवैध एक्स्ट्रा फ्यूल टैंक', भतीजे रोहित का दावा; इंटरनेशनल स्तर की होगी जांच!
अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के मामले में रोहित पवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे एक गहरी साजिश करार दिया है. उन्होंने अवैध फ्यूल टैंक और जांच में भारी लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय निगरानी समिति की मांग की है.
नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) द्वारा अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत के मामले की सीबीआई जांच की मांग के ठीक एक दिन बाद, 18 फरवरी 2026 को करजत विधायक रोहित पवार ने इस मामले में विस्फोटक खुलासे किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस विमान में अजित पवार सवार थे, उसमें अवैध रूप से अतिरिक्त फ्यूल टैंक लगाए गए थे. रोहित पवार के अनुसार, बारामती जैसी छोटी उड़ान के लिए इतने ईंधन की आवश्यकता नहीं थी, जबकि हैदराबाद में रिफ्यूलिंग का विकल्प मौजूद था. उन्होंने दावा किया कि मुख्य टैंक भरा होने के बावजूद ये दो अतिरिक्त टैंक 'बम' की तरह काम कर रहे थे, जिसके कारण धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी.
रोहित पवार ने जांच की कछुआ चाल पर भी कड़े सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि 2 फरवरी को जांच के आदेश के बावजूद फॉरेंसिक टीम देरी से पहुंची और 20 दिन बीत जाने के बाद भी कोई प्रारंभिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है. उन्होंने सीधे तौर पर डीजीसीए (DGCA) पर वीएसआर एविएशन कंपनी को बचाने का आरोप लगाया. रोहित ने बताया कि कंपनी के मालिक वी.के. सिंह और उनके बेटे रोहित सिंह का कुछ पता नहीं है. चौंकाने वाली बात यह है कि रोहित सिंह हादसे के तुरंत बाद मियामी चले गए, जबकि उन्हें पूछताछ के लिए रोका जाना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी और अन्य दलों के शक्तिशाली मंत्री इस कंपनी को संरक्षण दे रहे हैं.
तकनीकी गड़बड़ियां और रिकॉर्डिंग के साथ छेड़छाड़
विमान की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए रोहित पवार ने बताया कि डीजीसीए ने लियरजेट 45 का गलत मॉडल नंबर दर्ज किया था. विमान के इंजन पुराने थे और उड़ान के घंटे कागजों में 4915 बताए गए, जबकि असल में वे 8000 से अधिक थे. सबसे गंभीर आरोप ब्लैक बॉक्स की रिकॉर्डिंग को लेकर है; जहाँ दो घंटे की रिकॉर्डिंग होनी चाहिए थी, वहां केवल 30 मिनट का डेटा मिला. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि विमान का बीमा मूल्य (55 करोड़) और दायित्व बीमा (210 करोड़) उसके वास्तविक खरीद मूल्य (35 करोड़) से कहीं अधिक था, जो वित्तीय हेरफेर की ओर इशारा करता है.
अंतरराष्ट्रीय निगरानी समिति की मांग
रोहित पवार ने अब इस मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च-स्तरीय निगरानी समिति गठित करने की मांग की है. उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इस समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पवार परिवार के सदस्य, वरिष्ठ सांसद और एक जज शामिल हों. उन्होंने स्पष्ट किया कि वीवीआईपी यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाली वीएसआर एविएशन और डीजीसीए के अधिकारियों की भूमिका की जांच अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके.
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