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हिंदू मां और क्रिश्चियन पिता के बेटे ने अपनाया इस्लाम, आज दिन में पांच वक्त नमाज पढ़ते हैं ये टीवी एक्टर

टीवी एक्टर विवियन डीसेना ने कुछ साल पहले इस्लाम अपनाने का फैसला लिया था. उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने अपनी मर्जी से लिया और अब वह पूरी श्रद्धा के साथ पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं. उनकी शादी को लेकर भी काफी विवाद हुआ था.

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Babli Rautela

मुंबई: टीवी इंडस्ट्री के पॉपुलर एक्टर विवियन डीसेना अपनी एक्टिंग के साथ साथ अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहते हैं. कुछ साल पहले उन्होंने ऐसा फैसला लिया जिसने उनके फैंस को हैरान कर दिया था. विवियन ने साल 2019 में रमजान के महीने में इस्लाम धर्म अपना लिया था. विवियन पहले ईसाई धर्म का पालन करते थे. उनके परिवार की बात करें तो उनकी मां हिंदू हैं जबकि उनके पिता ईसाई थे. अलग अलग धार्मिक माहौल में पले बढ़े विवियन ने आखिरकार अपनी आस्था के आधार पर इस्लाम अपनाने का फैसला किया. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि यह फैसला पूरी तरह उनका अपना था. किसी के दबाव या मजबूरी में उन्होंने यह कदम नहीं उठाया.

विवियन डीसेना का कहना है कि इस फैसले के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया. उन्होंने बताया कि अब वह पूरी श्रद्धा के साथ इस्लाम का पालन करते हैं और रोज दिन में पांच बार नमाज पढ़ते हैं. उनके अनुसार नमाज पढ़ने से उन्हें मन की शांति और सुकून मिलता है. उन्होंने कहा कि यह आदत अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है.

रमजान के महीने में रखते हैं सख्त अनुशासन

विवियन डीसेना के लिए रमजान का महीना बेहद खास होता है. उन्होंने बताया कि यह सिर्फ रोजा रखने का समय नहीं बल्कि खुद को बेहतर बनाने का अवसर भी होता है. रोजा खोलने के लिए वह तीन खजूर, एक गिलास दूध और पानी लेते हैं. इसके अलावा वह घर पर खजूर का दूध भी बनाते हैं जिसमें खजूर, शहद, नट्स, ड्राई फ्रूट्स और ताजे फल मिलाए जाते हैं.

वह चीनी का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि सिर्फ शहद का प्रयोग करते हैं. उनका कहना है कि यह शरीर के लिए भी अच्छा होता है और ऊर्जा भी देता है. रमजान के पूरे महीने में वह कॉफी भी नहीं पीते. सुबह से शाम तक न खाना खाते हैं और न ही पानी पीते हैं. उनके अनुसार यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और मन को मजबूत बनाता है.

रमजान सिखाता है सब्र और संवेदना

विवियन का कहना है कि रमजान इंसान को अनुशासन और आत्म नियंत्रण सिखाता है. यह महीना इंसान को दूसरों के दर्द को समझने का मौका देता है. उनके मुताबिक जब कोई पूरे दिन भूखा प्यासा रहता है तो उसे उन लोगों की मुश्किलें समझ आती हैं जो गरीबी में जीवन बिताते हैं. इसी कारण वह इस महीने को आध्यात्मिक और मानसिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं.