'देवदास' के चांदनी चौक से लेकर 'पद्मावत' के महलों तक, भंसाली की हर फिल्म देखकर दर्शक क्यों हो जाते हैं मंत्रमुग्ध? ये है कारण

भंसाली साहब की सबसे बड़ी पहचान है उनके फिल्मों के सेट. वे पैसे की कोई कमी नहीं रखते और एक नई दुनिया रच देते हैं. 'देवदास' के चांदनी चौक से लेकर 'पद्मावत' के महलों और 'बाजीराव मस्तानी' की भव्य हवेलियों तक, हर सेट इतना डिटेल्ड होता है कि लगता है असली इतिहास या सपनों की दुनिया सामने है.

x
Antima Pal

मुंबई: संजय लीला भंसाली हिंदी सिनेमा के उन दुर्लभ निर्देशकों में से एक हैं, जिनकी हर फिल्म एक अलग ही जादू बिखेरती है. उनकी फिल्में देखकर दर्शक न सिर्फ कहानी में खो जाते हैं, बल्कि उस भव्य दुनिया में जीने लगते हैं. छोटी सी चॉल से निकलकर उन्होंने बॉलीवुड में अपना अलग मुकाम बनाया है. उनकी फिल्में क्यों इतनी खास और अलग लगती हैं? आइए जानते हैं 5 मुख्य कारण, जो उनके सिनेमा का सीक्रेट फॉर्मूला हैं.

1. भव्य और राजसी सेट्स

भंसाली साहब की सबसे बड़ी पहचान है उनके फिल्मों के सेट. वे पैसे की कोई कमी नहीं रखते और एक नई दुनिया रच देते हैं. 'देवदास' के चांदनी चौक से लेकर 'पद्मावत' के महलों और 'बाजीराव मस्तानी' की भव्य हवेलियों तक, हर सेट इतना डिटेल्ड होता है कि लगता है असली इतिहास या सपनों की दुनिया सामने है. 'गंगूबाई काठियावाड़ी' और 'हीरामंडी' में भी मुंबई की कोठों को उन्होंने इतने शानदार तरीके से दिखाया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. ये सेट सिर्फ बैकग्राउंड नहीं, बल्कि कहानी का हिस्सा बन जाते हैं.

2. इमोशनल गहराई और अधूरी प्रेम कहानियां

उनकी ज्यादातर फिल्मों का केंद्र अधूरा प्यार, दर्द और जज्बात होते हैं. 'हम दिल दे चुके सनम', 'देवदास', 'बाजीराव मस्तानी', 'पद्मावत' और 'गंगूबाई काठियावाड़ी' में प्रेम का वो दर्द दिखता है, जो दिल छू लेता है. भंसाली ने खुद जीवन में कई मुश्किलें देखी हैं, जैसे बचपन की तंगी और पारिवारिक संघर्ष, इसलिए उनके किरदारों में वो असली जज्बात झलकते हैं. महिलाओं को सशक्त और भावुक दिखाना उनकी खासियत है, जहां वे सिर्फ सुंदर नहीं, बल्कि मजबूत और संघर्षशील नजर आती हैं.

3. शानदार संगीत और गाने

भंसाली की फिल्मों का संगीत कभी नहीं भूलता. वे खुद म्यूजिक कंपोज करते हैं और गाने कहानी को आगे बढ़ाते हैं. 'देवदास' के 'दो लडके दिवाने', 'पद्मावत' के 'एक दिल एक जान' या 'राम लीला' के 'नागदा संग धोल' जैसे गाने सिनेमाई इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं. उनका संगीत क्लासिकल, लोक और आधुनिक का मिश्रण होता है, जो भावनाओं को और गहरा करता है.

4. परफेक्ट विजुअल ट्रीटमेंट और कलर पैलेट

उनकी फिल्में विजुअल पोएट्री की तरह हैं। रंगों का इस्तेमाल इतना खूबसूरत होता है – लाल का जुनून, नीला का राजसी अंदाज, सुनहरा का वैभव. हर फ्रेम पेंटिंग जैसा लगता है. कॉस्ट्यूम, मेकअप और कैमरा वर्क सब मिलकर एक आर्ट पीस बनाते हैं. वे महिलाओं की खूबसूरती को सम्मानजनक तरीके से दिखाते हैं, जो उनकी फिल्मों को खास बनाता है.

5. परफेक्शनिज्म और डेडिकेशन

भंसाली किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं करते. वे एक्टर से कई टेक करवाते हैं, सेट पर घंटों रिहर्सल कराते हैं. उनका जुनून हर डिपार्टमेंट में दिखता है – डायरेक्शन, प्रोडक्शन, एडिटिंग तक। यही वजह है कि उनकी फिल्में औसत से काफी ऊपर उठ जाती हैं और दर्शकों पर गहरा असर छोड़ती हैं. संजय लीला भंसाली का जादू इन सबमें छुपा है – भव्यता, भावनाएं, संगीत और परफेक्शन. उनकी फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक अनुभव हैं. आज 24 फरवरी 2026 को उनका 63वां जन्मदिन है, ऐसे में उनकी ये खासियतें याद करके फिर से उनकी फिल्में देखने का मन करता है.