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'कंगना को अदालतों में ले जाइए..', 'इमरजेंसी' के विवादों के बीच बोले मनोज मुंतशिर

कंगना रनौत की फिल्म 'इमरजेंसी' 6 सितंबर को रिलीज होने वाली थी लेकिन विवादों के कारण इस पर रोक लगा दी गई. अब इस बीच फिल्म पर चल रहे विवाद के बीच लिरिसिस्ट मनोज मुंतशिर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है तो चलिए जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा?

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कंगना रनौत की फिल्म 'इमरजेंसी' 6 सितंबर को रिलीज होने वाली थी लेकिन विवादों के कारण इस पर रोक लगा दी गई. दरअसल जब से सिख समुदाय ने इस फिल्म का विरोध किया और याचिका दायर कर इस फिल्म की रिलीज को रोकने की मांग की. इन विवादों के बीच सेंसर बोर्ड ने फिल्म को दिया सर्टिफिकेट भी वापस ले लिया. अब इस बीच फिल्म पर चल रहे विवाद के बीच लिरिसिस्ट मनोज मुंतशिर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है तो चलिए जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा?

मनोज मुंतशिर ने फिल्म इमरजेंसी की रोक को गलत बताया है और साथ ही सिख समुदाय की मांग को गलत बताते हुए कंगना की फिल्म 'इमरजेंसी' को लेकर कुछ बातें कही हैं.

मनोज ने कही ये बात

मनोज ने अपने इंस्टाग्राम का सहारा लेते हुए एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह कहते दिख रहे हैं, 'इमरजेंसी 6 सितंबर को रिलीज नहीं होगी, क्योंकि फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला. बहुत अच्छी बात है, लेकिन ये सर्टिफिकेट का खेल आधा-अधूरा क्यों खेला जा रहा है? इसको ठीक तरह से खेलिए. मैं तो कहता हूं कि लगे हाथ हमसे एक और सर्टिफिकेट छीन लेना चाहिए जो कि अभिव्यक्ति की आजादी का है, अरे छोड़िये ये महानता का ढोंग, एक फिल्म तो हमसे बर्दाश्त हो नहीं रही, और हम फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की बात करते हैं.'

मनोज ने आगे कहा- 'अच्छा, प्रॉब्लम क्या है इमरजेंसी से? दिक्कत ये है कि इंदिरा गांधी की निर्मम हत्या दिखाई गई है, तो क्या इंदिरा जी की मृत्यु रोड एक्सीडेंट में हुई थी या कोई और कारण था? दिक्कत ये है कि इंदिरा गांधी के हत्यारों को सिख दिखाया गया है तो आप मुझे बताएं कि सतवंत सिंह और बेअंत सिंह क्या सिख नहीं थे? बोला जा रहा है कि सिख समुदाय को इन हिस्सों पर आपत्ति है लेकिन मैं ये बिल्कुल नहीं मान सकता कि एक ओंकार सतनाम बोलकर सच्चाई के साथ खड़े होने वाले सिख किसी फिल्म में दिखाए गए सच से डर गए.

सिख भारतवर्ष के इतिहास का सुनहरा पन्ना है, जो अपने सिर पर केसरी पगड़ी बांधकर निकलते हैं तो पूरा देश उन्हें इज्जत से देखता है क्योंकि उस पगड़ी की सिलवट से हमारे महान गुरुओं का शौर्य झलकता है.