मेट गाला 2026 में दुनिया भर से तमाम मशहूर हस्तियों ने शिरकत की है. इस इवेंट में अमेरिकी मॉडल और एक्टिविस्ट लॉरेन वासर की खासी चर्चा रही. उन्होंने अपने सुनहरे प्रोस्थेटिक पैरों से सबका ध्यान खींचा खुद की तरफ खींच लिया. जहां कई लोगों ने उनके इस बोल्ड लुक की तारीफ की तो वहीं दोनों पैर खोने के पीछे की उनकी दर्दनाक कहानी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई.
दरअसल लॉरेन के पैर खो देने की कहानी बहुत दर्दनाक है. लॉरेन ने अपने पैर 'टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम' (TSS) के बाद खो दिए थे. दरअसव यह एक रियर और सीरियस मेडिकल कंडीशन है जो बैक्टीरियल इन्फेक्शन से जुड़ी होती है. जानकारी के अनुसार साल 2012 में जब लॉरेन सिर्फ 24 साल की थीं तब पीरियड्स के दौरान टैम्पोन इस्तेमाल करने की बाद उन्हें TSS हो गया था. गौरतब है कि टैम्पोन ऐसे सैनिटरी प्रोडक्ट्स होते हैं जिन्हें पीरियड्स के खून को सोखने के लिए शरीर के अंदर रखा जाता है. लॉरेन के बीमार होने के बाद डॉक्टरों ने पाया कि यह इन्फेक्शन जानलेवा हो गया था.
यह बीमारी यहीं नहीं रुकी. इन्फेक्शन फैलने के बाद लॉरेन को 'गैंग्रीन' हो गया ता. यह एक ऐसी कंडीशन है जिसमें शरीर के टिशू तक खून की सप्लाई नहीं पहुंच पाती है और टिशू मर जाते हैं. इस मेडिकल कंडीशन के बाद लॉरेन की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को 2012 में उनका दाहिना पैर काटना पड़ा था. 2018 में कुछ और परेशानियों के चलते उनका बायां पैर भी काटना पड़ गया. तभी से वह अपने स्टाइलिश गोल्डन प्रोस्थेटिक पैरों के लिए जानी जाने लगीं और उन्हें अक्सर 'गोल्डन पैरों वाली लड़की' (The Girl With The Golden Legs) कहा जाता है.
डॉक्टरों का कहना है कि टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम आमतौर पर 'स्टैफिलोकोकस ऑरियस' या 'ग्रुप A स्ट्रेप्टोकोकस' जैसे बैक्टीरिया की वजह से होता है. ये बैक्टीरिया खतरनाक टॉक्सिन छोड़ते हैं जो शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और पूरे शरीर पर असर डाल सकते हैं. हालांकि TSS को अक्सर टैम्पोन के इस्तेमाल से जोड़ा जाता है लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह किसी को भी हो सकता है.