टीवी जगत में शोक की लहर, 'कुमकुम भाग्य' फेम एक्ट्रेस संचिता उगले ने किया सुसाइड
'कुमकुम भाग्य' के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री संचिता उगले ने 30 साल की उम्र में आत्महत्या कर ली. उन्होंने अपनी साड़ी से फांसी लगाकर जान दी. इस घटना ने टीवी और फिल्म इंडस्ट्री को गहरे सदमे में डाल दिया है.
Sanchita Ugale Suicide: लोकप्रिय टीवी सीरियल 'कुमकुम भाग्य' के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री संचिता उगले ने 30 साल की उम्र में आत्महत्या कर ली. उन्होंने अपनी साड़ी से फांसी लगाकर जान दी. इस घटना ने टीवी और फिल्म इंडस्ट्री को गहरे सदमे में डाल दिया है. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.
'कुमकुम भाग्य' फेम एक्ट्रेस संचिता उगले ने किया सुसाइड
संचिता उगले हाल के वर्षों में टीवी धारावाहिकों में नजर आ रही थीं. 'कुमकुम भाग्य' के अलावा उन्होंने 'वागले की दुनिया' और 'दिलवाली दुल्हा ले जाएगी' जैसी शो में भी काम किया था. फिल्मों में हाल ही में विक्की कौशल की फिल्म 'छावा' में उन्होंने तराबाई का किरदार निभाया था. उन्होंने 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' शो में भी 'सुकून' का रोल किया था.
अंतिम सोशल मीडिया पोस्ट
संचिता का आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट बेहद खुशमिजाज था. 15 जून को उन्होंने एक रील पोस्ट की थी, जिसमें वे एक पॉपुलर गाने पर भरपूर एनर्जी के साथ डांस करती नजर आ रही थीं. मात्र 18 घंटे बाद उनकी मौत की खबर सामने आई. इस रील को अब उनके फैंस बार-बार देख रहे हैं और भावुक होकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
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इंडस्ट्री में शोक की लहर
संचिता की मौत की खबर मिलते ही टीवी जगत के कलाकारों, निर्देशकों और सहकर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई. कई अभिनेताओं ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके काम की तारीफ की. उन्हें एक प्रतिभाशाली और मेहनती अभिनेत्री बताया जा रहा है, जिनकी करियर में अच्छी शुरुआत हुई थी. परिवार, दोस्त और सहकर्मी इस घटना से बेहद सदमे में हैं. अभी तक आत्महत्या के पीछे का सही कारण सामने नहीं आया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और शव का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही ज्यादा जानकारी मिल सकेगी.
टीवी से फिल्म तक का सफर
संचिता उगले मुख्य रूप से टीवी इंडस्ट्री की अभिनेत्री थीं, लेकिन फिल्मों में भी उन्होंने अपनी जगह बनानी शुरू कर दी थी. छोटे पर्दे पर उनकी सहज अभिनय शैली और स्क्रीन पर मुस्कान के लिए उन्हें दर्शक पसंद करते थे. 'कुमकुम भाग्य' में उनके काम को खास तौर पर सराहा गया था.