साई पल्लवी से पहले कौन थीं असली सीता? कैसे इस किरदार ने समय के साथ बदली अपनी पहचान
रामायण फिल्म के नए वर्जन में साई पल्लवी के सीता किरदार को लेकर चर्चा तेज है. लेकिन इससे पहले भी कई कलाकारों ने इस भूमिका को जीवंत किया है. जानिए सीता के फिल्मी सफर की पूरी कहानी.
मुंबई: रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है. फिल्म में साई पल्लवी सीता के किरदार में नजर आएंगी. हालांकि अभी तक फिल्म का पूरा लुक सामने नहीं आया है, लेकिन दर्शकों की नजरें खासतौर पर सीता के किरदार पर टिकी हैं. क्योंकि रामायण की कहानी में सीता का महत्व बेहद गहरा और भावनात्मक है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि साई पल्लवी से पहले भी कई कलाकारों ने इस किरदार को अमर बनाया है.
जब पुरुषों ने निभाया था सीता का रोल
भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर में महिलाओं का फिल्मों में काम करना आसान नहीं था. समाज की पाबंदियों के कारण पुरुष ही महिला किरदार निभाते थे. इसी दौर में एक अनोखा उदाहरण सामने आया जब अन्ना सालुंके ने फिल्म लंका दहन में राम और सीता दोनों का किरदार निभाया था. यह सिनेमा इतिहास का बेहद खास पल था. इससे यह साफ होता है कि उस समय अभिनय कला किस तरह सीमाओं से जूझ रही थी.
पहली बार पर्दे पर आई असली सीता
समय के साथ हालात बदले और महिलाओं ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा. इसके बाद सीता के किरदार में भी असली भावनाएं और गहराई देखने को मिली. दुर्गा खोटे उन पहली एक्ट्रेसेस में थीं जिन्होंने फिल्म सीता में यह भूमिका निभाई. उनके अभिनय ने इस किरदार को एक नई पहचान दी. इसके बाद प्रभावती और शोभना समर्थ जैसी अभिनेत्रियों ने भी सीता के रूप को मजबूत बनाया. खास बात यह रही कि फिल्म राम राज्य को भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक फिल्मों में गिना जाता है.
भारतीय सिनेमा के अलग अलग हिस्सों में भी सीता का किरदार अलग अंदाज में दिखाया गया. तमिल, तेलुगू और मलयालम फिल्मों में कई एक्ट्रेसेस ने इस भूमिका को निभाया. पद्मिनी, गीतांजलि और अंजलि देवी जैसी कलाकारों ने सीता को सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप में प्रस्तुत किया. इन फिल्मों में सीता को त्याग, धैर्य और आदर्श नारी के रूप में दिखाया गया. यह उस दौर की सामाजिक सोच को भी दर्शाता है.
टीवी ने बनाया सीता को घर घर की पहचान
सिनेमा के बाद टीवी ने सीता के किरदार को हर घर तक पहुंचाया. रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण में दीपिका चिखलिया ने सीता का किरदार निभाया. उनका अभिनय इतना प्रभावशाली था कि लोग उन्हें असली सीता मानने लगे. यह वह दौर था जब टीवी पर आने वाले किरदार लोगों के दिलों में गहराई से बस जाते थे.
समय के साथ फिल्मों में भी बदलाव आया और सीता के किरदार को नए नजरिए से दिखाया जाने लगा. अब सीता को केवल त्याग की मूर्ति नहीं बल्कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर महिला के रूप में दिखाया जाता है. हाल की फिल्मों और कहानियों में उनके निर्णय लेने की क्षमता और भावनात्मक संघर्ष को भी जगह दी गई है.