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'दोबारा कभी UP की सरजमीं पर कदम नहीं रखूंगा..', दिशा पाटनी के घर के बाहर फायरिंग मामले में पांचवें आरोपी का एनकाउंटर, हुई गिरफ्तारी

Disha Patni's firing case: शुक्रवार रात करीब 11 बजे बिहारीपुर नदी पुल के आसपास पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि फायरिंग साजिश में शामिल अपराधी फरार हैं. शाही थाना पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर संदिग्धों को घेर लिया. जैसे ही पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.

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Anubhaw Mani Tripathi

Disha Patni's firing case: बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी के बरेली स्थित आवास पर हुई सनसनीखेज फायरिंग की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. इस हाई-प्रोफाइल मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक और बड़ा झटका दिया है.

शुक्रवार देर रात शाही थाना क्षेत्र में पुलिस ने साजिश के पांचवें आरोपी को मुठभेड़ में घायल अवस्था में दबोच लिया. आरोपी ने पकड़े जाने के बाद डरते हुए कहा, "सर, दोबारा कभी यूपी की सरजमीं पर कदम नहीं रखूंगा." यह वीडियो वायरल होते ही अपराधियों में पुलिस की सख्ती का अहसास करा गया.

बिहारीपुर पुल पर हुई गोलीबारी

शुक्रवार रात करीब 11 बजे बिहारीपुर नदी पुल के आसपास पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि फायरिंग साजिश में शामिल अपराधी फरार हैं. शाही थाना पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर संदिग्धों को घेर लिया. जैसे ही पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में 19 वर्षीय रामनिवास उर्फ दीपक उर्फ दीपू को पैर में गोली लगी. वह राजस्थान के बियावर जिले के थाना जैतारण, बेडकला का निवासी है. उसके सिर पर 25 हजार रुपये का इनाम था.

मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने दीपू के कब्जे से एक .32 बोर की पिस्टल, चार जिंदा और चार खोखा कारतूस बरामद किए. उधर, भागने की फिराक में लगा दूसरा आरोपी अनिल (सतीश पुत्र, सोनीपत, हरियाणा के राजपुर, थाना बडी निवासी) भी फरार नहीं हो सका. उसके पास .315 बोर का तमंचा, दो जिंदा और चार खोखा कारतूस बरामद हुए. दोनों बिना नंबर प्लेट वाली स्प्लेंडर प्लस बाइक पर सवार थे, जो अपराध की योजना का स्पष्ट संकेत देती है. घायल दीपू को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है. पुलिस का कहना है कि पूछताछ में और राज खुलेंगे.

रेकी से लेकर हमला तक

पुलिस जांच के मुताबिक, दीपू और उसके साथी दिशा पाटनी के घर की लंबे समय से रेकी कर रहे थे. वे लगातार सक्रिय थे और गैंग के इशारे पर काम कर रहे थे. इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है. याद रहे, 12 सितंबर की सुबह करीब 3:45 बजे बाइक सवार दो बदमाशों ने दिशा के सिविल लाइंस वाले घर पर नौ राउंड से ज्यादा फायरिंग की थी. हमले के तुरंत बाद गोल्डी बरार और रोहित गोदारा गैंग ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी ले ली. उन्होंने इसे दिशा की बहन खुशबू पाटनी द्वारा कथावाचक प्रेमानंद महाराज और अनिरुद्धाचार्य पर की गई टिप्पणियों का बदला बताया.

इस घटना ने बरेली में दहशत फैला दी. आसपास के लोग कुत्तों के भौंकने और गोलियों की आवाज से सहम गए. पुलिस ने 2500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की छानबीन कर आरोपियों की पहचान की. अब तक पांचों मुख्य आरोपियों पर कार्रवाई हो चुकी है. दो एनकाउंटर में ढेर, दो नाबालिग गिरफ्तार, और अब दीपू का पकड़ा जाना. इससे साफ है कि यूपी पुलिस का 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपराधियों को खौफजदा कर रही है.

सीएम योगी पर था भरोसा 

इस घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिशा के पिता, पूर्व डीएसपी जगदीश सिंह पाटनी से फ़ोन पर बात की. उन्होंने परिवार को पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया और गहन जाँच के आदेश दिए. दिशा के परिवार ने भी पुलिस की सराहना की है. हालांकि, पुलिस का मानना ​​है कि इस गिरोह की जड़ें गहरी हैं. रोहित गोदारा जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधी अभी भी सक्रिय हैं, इसलिए निगरानी बढ़ा दी गई है. यह मामला न केवल सेलिब्रिटी अपराध का एक उदाहरण है, बल्कि सोशल मीडिया पर फैलाए गए विवाद का एक खतरनाक रूप भी है.