मुंबई: भूत बंगला की कहानी एक काल्पनिक शहर मंगलपुर में सेट है, जहां आचार्य निवास नाम की एक पुरानी हवेली है. यह हवेली सिर्फ ईंट पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि कई रहस्यों का घर है. कहानी एक पारिवारिक जायदाद और उससे जुड़े रहस्य के इर्द गिर्द घूमती है. अक्षय कुमार का किरदार अनजाने में इस रहस्यमयी हवेली के जाल में फंस जाता है. जैसे जैसे रात गहराती है, हवेली का डरावना सच सामने आने लगता है.
इस फिल्म की जान इसकी स्टार कास्ट है. अक्षय कुमार एक बार फिर अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को प्रभावित करते हैं. उनकी एनर्जी फिल्म को लगातार जीवंत बनाए रखती है. वहीं परेश रावल अपने एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलीवरी से हर सीन को खास बना देते हैं. उनका कन्फ्यूजन ही दर्शकों की हंसी का सबसे बड़ा कारण बनता है. राजपाल यादव फिल्म के सरप्राइज पैकेज हैं. उनके डर और मासूमियत से भरे रिएक्शन आपको बार बार हंसने पर मजबूर करते हैं.
जब बात कॉमेडी की हो और प्रियदर्शन का नाम जुड़ जाए, तो उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं. उन्होंने इस फिल्म में हॉरर और कॉमेडी के बीच बेहतरीन संतुलन बनाया है. उनका डायरेक्शन इस बात का उदाहरण है कि बिना ओवरडायलॉग के भी सिचुएशनल कॉमेडी से दर्शकों को हंसाया जा सकता है. हर किरदार को सही जगह और महत्व दिया गया है.
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है. हवेली के अंदर के सीन, धुंधली गलियां और रात के डरावने पल दर्शकों को कहानी में पूरी तरह डुबो देते हैं. लाइट और शैडो का इस्तेमाल बहुत खूबसूरती से किया गया है, जिससे हर सीन में सस्पेंस बना रहता है.
फिल्म का म्यूजिक कहानी की रफ्तार को बनाए रखता है. गाने एंटरटेनिंग हैं और फिल्म के मूड के हिसाब से फिट बैठते हैं. लेकिन असली कमाल बैकग्राउंड स्कोर में देखने को मिलता है. हॉरर सीन में धीमा म्यूजिक डर पैदा करता है, जबकि कॉमेडी सीन में वही म्यूजिक मजेदार बन जाता है.
हालांकि फिल्म कई मायनों में शानदार है, लेकिन इसमें कुछ कमियां भी हैं. फिल्म का दूसरा हिस्सा थोड़ा लंबा महसूस होता है, जिससे कहानी की स्पीड थोड़ी धीमी पड़ जाती है. अगर आप पूरी तरह डरावनी फिल्म की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो थोड़ा निराश हो सकते हैं क्योंकि यहां हॉरर से ज्यादा फोकस कॉमेडी पर है.