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Adah Sharma: 'महिलाएं डरती हैं', अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ये क्या बोल गई अदा शर्मा, किस चीज का दे रही हैं हिंट?

अदा शर्मा अपनी शानदार और हिट फिल्मों के लिए जानी जाती है. एक्ट्रेस ने 1920, कमांडो 2, द केरल स्टोरी, बस्तर: द नक्सल स्टोरी जैसी फिल्मों में दमदार किरदार निभाए हैं. अब हाल ही में एक्ट्रेस ने नारीवाद, फिल्म इंडस्ट्री में चुनौतियों का सामना कर रही महिलाओं और बहुत कुछ के बारे में खुलकर बात की है.

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Babli Rautela

Adah Sharma On International Women Day: बॉलीवुड एक्ट्रेस अदा शर्मा अपनी शानदार फिल्मों और फिल्मों की कहानी के लिए जानी जाती हैं. एक्ट्रेस ने 1920, कमांडो 2, द केरल स्टोरी, बस्तर: द नक्सल स्टोरी जैसी फिल्मों में दमदार किरदार निभाए हैं. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर फ्री प्रेस जर्नल ने उन्होंने नारीवाद, फिल्म इंडस्ट्री में चुनौतियों का सामना कर रही महिलाओं और बहुत कुछ के बारे में खुलकर बात की है.

बातचीत में जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्या आप महिला दिवस पर अपने लिए कुछ खास करती हैं? तो इस सवाल पर एक्ट्रेस ने जवाब देते हुए कहा कि नहीं, मैं पूरे साल खुद को खास मानती हूं.

कब पुरुषों के बराबर होंगी महिलाएं 

इसके बाद जब एक्ट्रेस ने पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि नारीत्व का जश्न मनाने के लिए सिर्फ एक दिन काफी है? इसपर एक्ट्रेस ने कहा, अगर इससे किसी को खुशी मिलती है, जैसे साल में एक बार अपना जन्मदिन मनाना, तो यह बहुत बढ़िया है. लड़कियों को मौज-मस्ती करने दो! हम 2025 में हैं, जब महिलाएं पुरुषों के बराबर होंगी. लेकिन, आपको क्यों लगता है कि हमारे देश में महिलाओं की सुरक्षा अभी भी चिंता का विषय है? दुनिया भर में पुरुषों को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और फिर महिलाएं सुरक्षित रहेंगी.

'नारीवाद' शब्द पर अदा शर्मा की राय

नारीवाद का मतलब है समान अधिकार, समान अवसर. हमारे समाज में इतनी पितृसत्ता है कि बहुत सी महिलाएं यह कहने से डरती हैं कि वे नारीवादी हैं, क्योंकि इससे वे पुरुष, जो नारीवाद की परिभाषा नहीं जानते, उनके जैसे नहीं हो सकते

फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों के बारे में बात करते हुए अदा शर्मा ने कहा, दुनिया की तरह, फिल्म इंडस्ट्री में भी पुरुषों का वर्चस्व है. हर दिन अलग-अलग तरह की चुनौतियां नए आश्चर्य लेकर आती हैं. मुझे ऐसा लगता है कि मैं हर रोज एक सरप्राइज़ गिफ्ट खोल रही हूं. लगभग ऐसा लगता है जैसे मैं हर रोज महिला दिवस मना रही हूं.