नसीब या संयोग? लता मंगेशकर और आशा भोसले के निधन से जुड़े 3 हैरान कर देने वाले कनेक्शन
लता मंगेशकर और आशा भोसले के निधन से जुड़े चौंकाने वाले तीन संयोग सामने आए हैं- एक ही उम्र, एक ही अस्पताल और लगभग एक जैसी बीमारी. दोनों बहनों की यादें अब सिर्फ उनके गीतों में जीवित हैं.
भारतीय संगीत जगत को गहरा झटका लगा जब दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया. चार साल पहले उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर भी इसी उम्र में दुनिया को अलविदा कह चुकी थीं. दोनों बहनों ने दशकों तक संगीत की दुनिया पर राज किया. लेकिन उनके निधन से जुड़े कुछ ऐसे संयोग सामने आए हैं, जो लोगों को हैरान कर रहे हैं और एक भावनात्मक जुड़ाव भी दिखाते हैं.
एक ही उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
सबसे पहला और सबसे बड़ा संयोग दोनों बहनों की उम्र को लेकर है. लता मंगेशकर का निधन 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की उम्र में हुआ था. ठीक इसी तरह आशा भोसले ने भी 12 अप्रैल 2026 को 92 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. यह संयोग लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि दोनों बहनों की जिंदगी के कई पड़ाव कितने समान रहे. संगीत के क्षेत्र में भी दोनों ने लंबा और शानदार सफर तय किया और अंत तक अपनी पहचान बनाए रखी.
एक ही अस्पताल बना आखिरी ठिकाना
दूसरा बड़ा संयोग उस जगह से जुड़ा है, जहां दोनों ने अपनी आखिरी सांस ली. लता मंगेशकर को कोविड संक्रमण के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां लंबा इलाज चलने के बाद उनका निधन हुआ. वहीं, आशा भोसले को भी अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया. चेस्ट इन्फेक्शन और कमजोरी के चलते उनकी हालत बिगड़ी और वहीं उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. एक ही अस्पताल का यह जुड़ाव इस कहानी को और भावुक बना देता है.
बीमारी और कारणों में भी समानता
तीसरा संयोग दोनों के निधन के कारणों में नजर आता है. लता मंगेशकर पहले कोविड से संक्रमित हुईं और बाद में उन्हें निमोनिया हो गया, जिसके चलते मल्टी ऑर्गन फेलियर हुआ. आशा भोसले के मामले में भी शुरुआत में अलग-अलग कारण सामने आए, लेकिन आखिरकार डॉक्टरों ने बताया कि उनका निधन भी मल्टी ऑर्गन फेलियर के कारण हुआ. यह समानता दर्शाती है कि दोनों ने जीवन के अंतिम दौर में लगभग एक जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना किया.
सुरों में हमेशा जिंदा रहेंगी दोनों बहनें
आज भले ही दोनों महान गायिकाएं इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और गीत हमेशा जीवित रहेंगे. लता मंगेशकर को ‘स्वर कोकिला’ कहा जाता था, जबकि आशा भोसले ने अपनी बहुमुखी गायकी से अलग पहचान बनाई. दोनों ने मिलकर भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनके गाए गीत आज भी हर पीढ़ी के दिलों में बसे हुए हैं और आने वाले समय में भी उनकी विरासत यूं ही कायम रहेगी.