दुनिया में कैसे सबसे पहले तय किया गया था समय, जानें कब हुआ था घड़ी का अविष्कार
घड़ी के आविष्कार से पहले इंसान सूरज, चांद और पानी के सहारे समय मापता था और धीरे धीरे आधुनिक घड़ियों का विकास हुआ. सभ्यता के शुरुआती दौर में समय का ज्ञान पूरी तरह प्रकृति पर आधारित था.
नई दिल्ली: आज की दुनिया में समय इंसान की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन यह व्यवस्था अचानक नहीं बनी. घड़ी के आविष्कार से बहुत पहले भी इंसान समय को समझता और मापता था. सभ्यता के शुरुआती दौर में समय का ज्ञान पूरी तरह प्रकृति पर आधारित था. सूरज का उगना दिन की शुरुआत और डूबना दिन के अंत का संकेत माना जाता था. चांद के घटते बढ़ते चरणों से महीनों की गणना होती थी और तारों की चाल से मौसम और ऋतुओं का अंदाजा लगाया जाता था.
समय को व्यवस्थित रूप से बांटने की पहली बड़ी कोशिश प्राचीन मिस्र में देखने को मिलती है. करीब 1550 से 1069 ईसा पूर्व के बीच मिस्रवासियों ने दिन को 24 भागों में बांटा. इसमें 12 घंटे दिन के और 12 घंटे रात के लिए तय किए गए. हालांकि उस समय घंटे की लंबाई स्थिर नहीं थी. गर्मियों में दिन लंबे होने से घंटे बड़े और सर्दियों में छोटे होते थे.
कैसा था पहला ज्ञात उपकरण?
समय मापने का पहला ज्ञात उपकरण धूप घड़ी मानी जाती है. इसमें जमीन में एक सीधी छड़ी लगाई जाती थी जिसे नोमोन कहा जाता था. सूरज की स्थिति बदलने के साथ छड़ी की छाया भी बदलती थी और इसी से समय का अनुमान लगाया जाता था. प्राचीन मिस्र में लगभग 1500 ईसा पूर्व की धूप घड़ी के प्रमाण मिलते हैं.
धूप घड़ी की क्या थी कमी?
धूप घड़ी की सबसे बड़ी कमी यह थी कि वह रात या बादलों के समय काम नहीं करती थी. इसी समस्या के समाधान के लिए पानी की घड़ी बनाई गई. भारत में इसे घटी यंत्र कहा जाता था. इसमें एक बर्तन से दूसरे बर्तन में पानी के बहाव के जरिए समय मापा जाता था. तय समय में कितना पानी निकला, इसी से समय का हिसाब लगाया जाता था.
कब आया बड़ा बदलाव?
समय मापने में असली बदलाव 14वीं सदी में आया, जब यूरोप में मैकेनिकल घड़ियों का आविष्कार हुआ. इन घड़ियों में वजन, गियर और एस्केपमेंट मैकेनिज्म का इस्तेमाल होता था. यह घड़ियां प्राकृतिक रोशनी पर निर्भर नहीं थीं, हालांकि शुरुआती दौर में ये ज्यादा सटीक नहीं थीं.
कब आई पेंडुलम घड़ी?
1656 में डच वैज्ञानिक क्रिश्चियन ह्यूजेंस ने पेंडुलम घड़ी बनाई. इससे समय मापने की सटीकता में बड़ा सुधार हुआ. इसके बाद 1505 में जर्मनी के पीटर हेनलेन ने पहली पोर्टेबल घड़ी बनाई, जिससे लोग समय को अपने साथ ले जाने लगे.