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CBSE का नया भाषा फॉर्मूला, अब स्कूलों में नहीं पढ़ाई जाएगी अंग्रेजी! छात्रों को मिलेंगे ये नए ऑप्शन

सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति के तहत बड़ा बदलाव करते हुए क्लास 6 से तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने का फैसला लिया है जिसमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी और अंग्रेजी को विदेशी भाषा के रूप में रखा गया है.

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Babli Rautela

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए नया तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने का ऐलान किया है. यह बदलाव National Education Policy 2020 के तहत किया जा रहा है और इसे 2026 से लागू किया जाएगा. इस फैसले का सबसे बड़ा असर क्लास 6 के छात्रों पर पड़ेगा जहां अब उन्हें तीन भाषाएं पढ़नी होंगी जिनमें से दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी.

नए नियम के तहत भाषा विषयों को तीन भागों में बांटा गया है.

  • R1 यानी पहली भाषा
  • R2 यानी दूसरी भाषा
  • R3 यानी तीसरी भाषा

इन तीनों में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होना जरूरी है. इसका मतलब यह है कि छात्रों को अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा के साथ एक और भारतीय भाषा सीखनी होगी.

क्या अब जरूरी नहीं रही अंग्रेजी?

इस नए सिस्टम में अंग्रेजी को विदेशी भाषा के विकल्प में रखा गया है. यानी अब अंग्रेजी पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा. छात्र चाहें तो इसे तीसरी भाषा के रूप में चुन सकते हैं और चाहें तो किसी अन्य विदेशी भाषा का विकल्प ले सकते हैं. हालांकि यह साफ किया गया है कि छात्र एक साथ अंग्रेजी और दूसरी विदेशी भाषा दोनों नहीं चुन सकते.

संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं को मिलेगा बढ़ावा

इस बदलाव से भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. स्कूलों का मानना है कि ज्यादातर जगहों पर दूसरी भारतीय भाषा के रूप में संस्कृत को चुना जा सकता है क्योंकि इसके लिए शिक्षक आसानी से उपलब्ध हैं. इसके अलावा कुछ स्कूल क्षेत्रीय भाषाओं जैसे पंजाबी, बंगाली, तमिल, तेलुगु और मराठी का विकल्प भी दे सकते हैं.

इस नए नियम के साथ स्कूलों के सामने कई चुनौतियां भी आएंगी. सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि दूसरी भारतीय भाषा कौन सी हो इसे तय करना. दिल्ली जैसे शहरों में जहां अलग अलग राज्यों के छात्र पढ़ते हैं वहां यह फैसला लेना आसान नहीं होगा. इसके अलावा अलग अलग भाषाओं के लिए शिक्षकों की व्यवस्था करना भी एक बड़ी जिम्मेदारी होगी.

कब तक पूरी तरह लागू होगा नया सिस्टम?

यह नया सिस्टम 2026 से क्लास 6 में शुरू होगा और धीरे धीरे आगे की कक्षाओं में लागू किया जाएगा. 2031 तक यह पूरी तरह से क्लास 10 तक लागू हो जाएगा. अभी तक छात्र दो भाषाएं पढ़ते थे लेकिन नए नियम के तहत तीन भाषाएं पढ़ना जरूरी होगा.