महंगा तेल बिगाड़ेगा भारत का खेल! FY27 में जीडीपी की रफ्तार होगी धीमी, वर्ल्ड बैंक ने दिए संकेत
विश्व बैंक के अनुसार ईंधन और खाद की बढ़ती कीमतों के कारण वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.6% रह सकती है. हालांकि जीएसटी कटौती और निर्यात में सुधार से 2027-28 में यह फिर 7.2% तक पहुंच जाएगी.
नई दिल्ली: विश्व बैंक की जून 2026 में आई 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स' रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है. इसका सबसे बड़ा कारण एनर्जी यानी ईंधन और बिजली की बढ़ती कीमतें हैं जिससे आम जनता और कंपनियों दोनों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है.
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि जहां वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है वहीं 2026-27 में यह घटकर 6.6 प्रतिशत पर आ सकती है. दरअसल कच्चे तेल, नेचुरल गैस और खादों के महंगे होने से कंपनियों की लागत बढ़ गई है. जब कंपनियों के लिए सामान बनाना महंगा होगा तो इसका असर बाजार पर भी दिखेगा.
खर्च करने की क्षमता पर होगा असर
ईंधन के महंगे होने से लोगों के खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है जिससे प्राइवेट डिमांड में कमी आ सकती है. हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार ने जनता को महंगाई से बचाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी दरों में की गई कटौती से परिवारों को राहत मिलेगी और वे बाजार में खर्च करना जारी रख सकेंगे. इसके अलावा सरकार ने फ्यूल टैक्स को भी कम किया है ताकि अचानक बढ़ने वाली कीमतों के झटके से आम लोगों और कारोबारियों को बचाया जा सके.
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साल की शुरूआत में स्थिति मजबूत
अच्छी बात यह है कि साल की शुरुआत में भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत रही है. गांवों और शहरों दोनों जगह मांग में सुधार देखा गया है जिसने वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी हमारी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को थामे रखा. साथ ही अमेरिका जैसे बड़े देशों के साथ होने वाले नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) और कम टैक्स दरों का फायदा भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर को मिल सकता है. इससे वैश्विक मंदी के असर को कम करने में मदद मिलेगी.
पूरी दुनिया में आर्थिक सुस्ती
वैश्विक स्तर पर देखें तो पूरी दुनिया में आर्थिक सुस्ती का माहौल है. साल 2025 में जहां वैश्विक विकास दर 2.9 प्रतिशत थी, वह 2026 में घटकर 2.5 प्रतिशत रह सकती है जो कोरोना महामारी के बाद सबसे कमजोर रफ्तार है. लेकिन भारत के लिए भविष्य की तस्वीर काफी उम्मीदों भरी है. विश्व बैंक का मानना है कि इस मामूली गिरावट के बाद वित्तीय वर्ष 2027-28 में भारत की ग्रोथ रेट फिर से बढ़कर 7.2 प्रतिशत और 2028-29 में 7.0 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी. मजबूत घरेलू मांग और बेहतर होते निर्यात के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर शानदार वापसी करेगी.