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ईरान-अमेरिका युद्ध से क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, सामने आई रिपोर्ट

विश्लेषकों का मानना है कि कई राज्यों में चुनाव नजदीक होने के कारण भी सरकार ईंधन कीमतों में तत्काल वृद्धि से बचना चाहती है.

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Sagar Bhardwaj

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. यह बढ़ोतरी अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों और उसके जवाबी कदमों के बाद हुई. कच्चे तेल के महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है.

फिलहाल आम लोगों को राहत, कीमतें स्थिर रहने की संभावना

हालांकि तेल महंगा होने के बावजूद फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की संभावना कम बताई जा रही है. सरकारी तेल विपणन कंपनियां अभी कीमतों को स्थिर रख सकती हैं. जानकारी के अनुसार अप्रैल 2022 से खुदरा ईंधन कीमतों में बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं. उस दौरान अंतरराष्ट्रीय कीमतें ज्यादा होने पर कंपनियों ने नुकसान सहा, जबकि कीमतें कम होने पर उन्होंने मार्जिन बनाया.

तेल कंपनियों के पास है वित्तीय कुशन

सूत्रों का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियों के पास इतना वित्तीय संतुलन है कि वे मौजूदा कीमत वृद्धि को कुछ समय तक संभाल सकती हैं. वर्ष 2022 में जब कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक गया था, तब भी कंपनियों ने सीमित मुनाफे के साथ काम किया. इसके बाद कीमतें नरम होने पर उन्हें बड़ा लाभ हुआ. मौजूदा वित्तीय वर्ष में दिसंबर तिमाही तक प्रमुख सरकारी कंपनियां मजबूत लाभ दर्ज कर चुकी हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ डालने की जरूरत नहीं मानी जा रही.

 होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा, आपूर्ति चिंता बढ़ीॉ

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से तेल आपूर्ति मार्ग भी प्रभावित हो सकते हैं. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य महत्वपूर्ण है, जहां से भारत के लगभग आधे तेल आयात गुजरते हैं. यदि वहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो आपूर्ति बाधित हो सकती है और वैश्विक कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है.

सरकार स्थिति पर रखे हुए है नजर

तेल और गैस आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ बैठक की. सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और कीमतों को संतुलित रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

चुनावी समय में उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश

विश्लेषकों का मानना है कि कई राज्यों में चुनाव नजदीक होने के कारण भी सरकार ईंधन कीमतों में तत्काल वृद्धि से बचना चाहती है. जब तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज और लगातार उछाल नहीं आता, तब तक आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर राहत मिलने की संभावना बनी रहेगी.

कुल मिलाकर, वैश्विक बाजार में तेल महंगा जरूर हुआ है, लेकिन भारत में अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही है. सरकार और तेल कंपनियां मिलकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि आम लोगों पर अचानक महंगाई का बोझ न पड़े.