बजट से पहले क्यों डरे हुए हैं लोग, संभलकर खर्च कर रहे पैसा, क्या फिर मेहरबान होगी मोदी सरकार?

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में बाहर खाना, शॉपिंग और एंटरटेनमेंट जैसी डिस्क्रेशनरी कैटेगरी पर खर्च करने की इच्छा घटकर 55% रह गई है, जबकि 2024 में यह 58% थी.

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Sagar Bhardwaj

1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026 से पहले देश में कंज्यूमर सेंटिमेंट पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क और व्यावहारिक नजर आ रहा है. रिसर्च फर्म Kantar की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, लोग अब बड़े खर्च करने से पहले ज्यादा सोच-विचार कर रहे हैं. हालांकि पिछले बजट को लेकर संतुष्टि का स्तर अच्छा था, लेकिन मौजूदा आर्थिक हालात ने लोगों को सावधान बना दिया है.

उत्साह से प्रैक्टिकल सोच की ओर

Kantar के साउथ एशिया मैनेजिंग डायरेक्टर दीपेंद्र राणा ने बताया कि बीते कुछ सालों में उपभोक्ताओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है. पहले जहां लोग भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी थे, अब वे ज्यादा प्रैक्टिकल फैसले ले रहे हैं. महंगाई, नौकरी की अनिश्चितता, ग्लोबल तनाव और जियो-पॉलिटिकल हालात ने खर्च करने की आदतों को प्रभावित किया है.

डिस्क्रेशनरी खर्च में गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में बाहर खाना, शॉपिंग और एंटरटेनमेंट जैसी डिस्क्रेशनरी कैटेगरी पर खर्च करने की इच्छा घटकर 55% रह गई है, जबकि 2024 में यह 58% थी. इसी तरह ट्रैवल, गाड़ियां, लग्जरी सामान और प्रॉपर्टी जैसी महंगी खरीदारी पर खर्च करने की इच्छा भी घटकर 46% हो गई है, जो दो साल पहले 51% थी.

टैक्स राहत के बावजूद चिंता कायम

हालांकि पिछले बजट में इनकम टैक्स में राहत दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद लोग अपनी आर्थिक सुरक्षा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. खासतौर पर मिडिल क्लास को लगता है कि अभी और टैक्स सुधारों की जरूरत है, ताकि बचत बढ़े और खर्च करने की क्षमता मजबूत हो.

बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें

रिपोर्ट के मुताबिक, लोग स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए करने, सेक्शन 80 के तहत ज्यादा टैक्स छूट और मेडिकल व हेल्थ इंश्योरेंस पर अधिक रिबेट की उम्मीद कर रहे हैं. उपभोक्ताओं का मानना है कि इससे उन्हें वास्तविक राहत मिलेगी.

5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी पर बदला नजरिया

भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने के लक्ष्य को लेकर भी अब लोग ज्यादा यथार्थवादी हो गए हैं. पहले यह लक्ष्य 2027-28 तक संभव माना जा रहा था, अब उम्मीद 2028-29 तक खिसक गई है.

AI और मार्केट को लेकर चिंता

रिपोर्ट में सामने आया है कि 18% लोगों को AI की वजह से नौकरी जाने का डर है, जबकि 54% लोग AI के गलत इस्तेमाल और फाइनेंशियल फ्रॉड को लेकर चिंतित हैं. वहीं, ज्यादातर निवेशकों को लगता है कि सेंसेक्स इस साल बहुत तेज उछाल नहीं दिखाएगा.

अपस्किलिंग की जरूरत

दीपेंद्र राणा के अनुसार, भारत की ग्रोथ स्टोरी को मजबूत बनाए रखने के लिए अपस्किलिंग, जिम्मेदार AI पॉलिसी और डिजिटल ट्रस्ट पर सरकार को खास ध्यान देना होगा.