भारत का पहला बजट कब और किसने किया था पेश? 99% लोग नहीं जानते होंगे जवाब

भारत का पहला बजट कब लिखा गया था? क्या आप इस सवाल का जवाब जानते हैं, अगर नहीं, तो यहां हम आपको भारत के पहले बजट के बारे में सभी जानकारी दे रहे हैं. 

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: भारत में 1 फरवरी को संसद में आम बजट पेश किया जाएगा. बजट को लेकर लोगों को कई उम्मीदें हैं, हालांकि ये उम्मीदें पूरी होंगी या नहीं, इसके बारे में तो बजट पेश होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. इस बार का बजट तो कुछ ही दिनों में सभी के सामने आ जाएगा, लेकिन एक सवाल जो लोगों के दिलों दिमाग में रहता है, वो है कि आखिर ये परंपरा कहां से शुरू हई? बजट को भारतीय लोकतंत्र का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा क्यों माना जाता है?

आपके मन में भी इतने ही सवाल आते होंगे. बस इसी का जवाब हम आपको यहां दे रहे हैं. बता दें कि केंद्रीय बजट सिर्फ संख्याओं और टैक्स के बारे में नहीं है. यह देश की प्राथमिकताओं, योजनाओं और भविष्य की दिशा को दिखाता है. चलिए जानते हैं, भारत में सबसे पहला बजट कब पेश किया गया था और किसने पेश किया था. 

भारत में बजट का इतिहास:

भारत में बजट बनाने का इतिहास ब्रिटिश शासन से जुड़ा है. 7 अप्रैल, 1860 को भारत का पहला बजट पेश किया गया था. यह तब हुआ था जब भारत ब्रिटिश के कंट्रोल में था. इस दौरान जेम्स विल्सन ने बजट पेश किया था, जो उस समय ब्रिटिश भारत के वित्त मंत्री थे. ये बजट सार्वजनिक कल्याण, विकास और सामाजिक योजनाओं पर फोकस करता है. 

यह पहला बजट था, जो ब्रिटिश प्रशासन की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया था. इसका उद्देश्य आम जनता के जीवन को बेहतर बनाना नहीं था, बल्कि औपनिवेशिक सरकार को चलाने के लिए रेवन्यू इकट्ठा करना था.

जब भारत को 1947 में आजादी मिली तो देश के लिए चुनौतीपूर्ण दौर था. स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर, 1947 को सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था, जो देश के पहले वित्त मंत्री थे. यह बजट उस समय पेश किया गया था, जब भारत के लिए समय बेहद ही मुश्किल था. इस समय लोगों के मन में बंटवारे का दुख, लोगों के पलायन की गंभीर स्थिति और आर्थिक अनिश्चितता थी. इस बजट से लोगों को काफी उम्मीद थी कि बजट से स्थिरता आ सके. 

पाकिस्तान से भी था पहले बजट का संबंध:

नियमित वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल, 1948 से शुरू होना था, ऐसे में नवंबर 1947 को जो बजट पेश किया गया था वो अंतरिम था. इस बजट का फोकस खर्चों का प्रबंधन और अर्थव्यवस्था को दिशा देना था. इस बजट को लेकर एक दिलचस्प फैक्ट है जिसे काफी कम लोग जानते हैं कि इसका संबंध पाकिस्तान से था. भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुए ज्यादा समय नहीं बीता था और कुछ समय तक दोनों देशों ने एक ही करेंसी का इस्तेमाल किया था. इस बजट में साफतौर पर कहा गया था कि सितंबर 1948 तक सामान्य मुद्रा प्रणाली बनी रहेगी, क्योंकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था एभी भी एक-दूसरे से काफी हद तक जुड़ी हुई थीं. दोनों नए देशों की अर्थव्यवस्थाएं अभी भी एक-दूसरे से बहुत करीब से जुड़ी हुई थीं. 

भारत के पहले बजट के रेवन्यू का अनुमान 171.15 करोड़ रुपये लगाया गया था. वहीं, फिस्कल डेफिसिट 204.59 करोड़ रुपये था. सरकार के पास फंड सीमित था और कई चुनौतियां भी थीं. सरकार ने एडमिनिस्ट्रेशन, शरणार्थियों के पुनर्वास और भविष्य के विकास पर काम किया और एक मजबूत नीवं रखने की कोशिश की. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह बजट भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंशियल प्लानिंग की यात्रा की एक मजबूत शुरुआत थी.