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India Daily

चीनी सस्ती होने लगी, फिर भी क्यों नहीं मिली पूरी राहत? सामने आई बड़ी वजह

चीनी की कीमतों में एक हफ्ते बाद राहत के संकेत मिले हैं. देशभर में औसत खुदरा भाव 3.85% घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो हो गया है. थोक बाजार में भी कीमत 57.62 रुपये प्रति किलो पर आ गई.

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Edited By: Reepu Kumari
चीनी सस्ती होने लगी, फिर भी क्यों नहीं मिली पूरी राहत? सामने आई बड़ी वजह
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: चीनी खरीदने वाले लोगों के लिए बाजार से थोड़ी राहत की खबर सामने आई है. लगातार महंगे हो रहे भाव अब कुछ नीचे आए हैं. देशभर में चीनी का औसत खुदरा भाव एक सप्ताह में 3.85% घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो हो गया है. इससे पहले यह 65.08 रुपये प्रति किलो था. हालांकि, कीमत में यह गिरावट अभी इतनी बड़ी नहीं है कि ग्राहकों को पूरी राहत महसूस हो.

थोक बाजार पर असर

खास बात यह है कि चीनी का मौजूदा खुदरा भाव पिछले महीने के 49.33 रुपये प्रति किलो से करीब 27% ऊपर है. सरकार ने बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए चीनी के आयात और स्टॉक से जुड़े कदम उठाए हैं. इनका असर अब थोक बाजार में दिखाई देने लगा है. लेकिन दुकानों पर इसका पूरा फायदा पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है.

थोक बाजार में भी दिखी गिरावट

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर को चीनी का औसत थोक भाव 57.62 रुपये प्रति किलो रहा. एक सप्ताह पहले यह 60.39 रुपये प्रति किलो था. यानी थोक कीमत में 2.77 रुपये प्रति किलो की कमी दर्ज हुई है.

दुकानदारों के पुराने स्टॉक से अटकी राहत

थोक भाव घटने के बावजूद खुदरा बाजार में गिरावट धीमी है. इसकी बड़ी वजह दुकानदारों के पास रखा पुराना स्टॉक है. कई रिटेलर्स ने चीनी पहले ही महंगे भाव पर खरीदी है. इसलिए उसे तुरंत कम कीमत पर बेचने से उन्हें नुकसान हो सकता है.

सस्ता माल पहुंचने में लगेगा वक्त

उद्योग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, खुदरा कीमतों में बदलाव आने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं. आम तौर पर एक दुकानदार के पास चीनी की 10 से 15 बोरियां रहती हैं. प्रत्येक बोरी करीब 50 किलो की होती है. पुराना माल खत्म होने और नया सस्ता स्टॉक आने के बाद कीमतों में ज्यादा कमी दिख सकती है.

सरकार ने बढ़ाई बाजार पर नजर

कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल में कई कदम उठाए हैं. इनमें 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति देना भी शामिल है. इसके साथ ही बल्क यूजर्स और डीलरों के लिए स्टॉक रखने से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं. इन प्रयासों के बाद थोक बाजार में नरमी देखने को मिली है.

उत्पादन अनुमान में आई कमी

2025 26 मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन किया गया है. इसके बावजूद सरकार के मुताबिक देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सालाना घरेलू खपत करीब 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है.