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Stock market Today: खुलते ही क्रैश हो गया शेयर बाजार! अब तक के सबसे निचले स्तर पर रुपया

सोमवार सुबह भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखी गई. शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 23 पैसे टूटकर 86.27 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.

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Babli Rautela

Stock market Today: सोमवार सुबह भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखी गई. BSE सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में कारोबार के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई. सुबह 9:31 बजे, सेंसेक्स 652 अंक (0.84%) की गिरावट के साथ 76,726.48 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 202 अंक (0.86%) गिरकर 23,229.90 पर आ गया.

शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 23 पैसे टूटकर 86.27 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. शुक्रवार को बाजार में कमजोरी की स्थिति बनी रही, जिसमें कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने नकारात्मक प्रभाव डाला.

तकनीकी एक्सपर्ट नागराज शेट्टी के अनुसार, 'अगर बाजार 23,260 के समर्थन स्तर से नीचे गिरता है, तो यह निफ्टी में और गिरावट ला सकता है. इसके लिए अगला समर्थन स्तर 23,000 के करीब है, जबकि 23,700 का स्तर तत्काल प्रतिरोध बना हुआ है.'

अमेरिकी और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर

शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट देखी गई. इसके साथ ही एसएंडपी 500 ने इस साल के अपने सभी लाभ खो दिए. यह गिरावट मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद आई, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत हो गई. इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा. नए रूसी प्रतिबंधों और मजबूत डॉलर की वजह से कच्चे तेल की कीमतें चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं. इसके साथ ही बता दें की तेल की कीमतों में यह उछाल निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा रहा है.

आज F&O में बैन शेयरों की सूची में शामिल हैं:

  • मणप्पुरम फाइनेंस
  • आरबीएल बैंक
  • हिंदुस्तान कॉपर
  • एलटी फाइनेंस
  • बंधन बैंक

FII और DII का योगदान

एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) ने शुक्रवार को कुल 2,254 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. वहीं, डीआईआई (घरेलू संस्थागत निवेशक) ने 3,962 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. एफआईआई की शुद्ध शॉर्ट पोजीशन बढ़कर 2.77 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो इससे पहले 2.67 लाख करोड़ रुपये थी.

बाजार एक्सपर्ट का कहना है कि निवेशकों की निगाहें अब अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल डेटा पर टिकी हैं. तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत डॉलर का असर घरेलू बाजार पर नकारात्मक हो सकता है. अल्पावधि में बाजार में निरंतर समेकन की संभावना है.