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जापान-कोरिया में तेजी, भारत में तबाही! खुलते ही क्यों क्रैश हुआ शेयर बाजार?

एशियाई बाजारों में तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत ने निवेशकों को चौंका दिया. सेंसेक्स और निफ्टी खुलते ही तेज गिरावट में चले गए, जिससे बाजार की दिशा पर सवाल खड़े हो गए.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
जापान-कोरिया में तेजी, भारत में तबाही! खुलते ही क्यों क्रैश हुआ शेयर बाजार?
Courtesy: social media

मुंबई: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. जहां जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग जैसे एशियाई बाजार मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे, वहीं भारतीय बाजार खुलते ही भारी दबाव में नजर आए. सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआती गिरावट ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर जब वैश्विक संकेत सकारात्मक थे, तो घरेलू बाजार क्यों फिसल गया.

सेंसेक्स-निफ्टी की खराब शुरुआत

सोमवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,576.24 के मुकाबले कमजोर खुला. ओपनिंग के कुछ ही मिनटों में यह 525 अंकों से ज्यादा टूटकर 83,043 के स्तर तक आ गया. इसी तरह एनएसई निफ्टी भी 25,683.30 के पिछले बंद से गिरकर खुला और शुरुआती कारोबार में ही 150 अंकों से ज्यादा फिसल गया. इस अचानक गिरावट ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी.

एशियाई बाजारों में क्यों थी तेजी

भारतीय बाजार के उलट एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को मजबूती दिखी. जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग सभी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे. निवेशकों को वहां से सकारात्मक संकेत मिल रहे थे, जिससे यह उम्मीद थी कि भारतीय बाजार भी उसी रफ्तार में खुलेंगे, लेकिन तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आई.

भारतीय बाजार पर दबाव के कारण

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय बाजार पर घरेलू कारणों का असर ज्यादा दिखा. मुनाफावसूली, कुछ बड़े शेयरों में बिकवाली और निवेशकों की सतर्कता ने शुरुआती कारोबार में दबाव बनाया. इसके अलावा हालिया तेजी के बाद कई निवेशक जोखिम कम करना चाहते थे, जिसका असर सीधे सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा.

निवेशकों की चिंता और बाजार का मूड

तेज गिरावट के बाद छोटे और मझोले निवेशकों में चिंता साफ दिखी. शुरुआती झटके से बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ और कई सेक्टर्स में बिकवाली बढ़ गई. हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह गिरावट घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की स्थिति है, क्योंकि दिन के कारोबार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

आगे बाजार की राह

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे. अगर निवेशकों का भरोसा लौटता है तो गिरावट से उबरने की संभावना है. फिलहाल, बाजार पर नजर बनाए रखना और जल्दबाजी से बचना निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति मानी जा रही है.