निवेशकों की हुई बल्ले-बल्ले! सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में बढ़त के साथ बंद हुआ कारोबार
भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स 166 अंक और निफ्टी 24,383 के पार पहुंचा. ऑटो व फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी रही, जबकि आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में हल्की कमजोरी देखने को मिली.
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया. दिनभर उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा बना रहा, जिसकी बदौलत बाजार हरे निशान में बंद हुआ. खासतौर पर ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. वहीं आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी का असर भी नजर आया, लेकिन इससे बाजार की कुल तेजी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा.
बढ़त के साथ बंद हुआ मार्केट
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 166.49 अंक यानी 0.21 फीसदी की बढ़त के साथ 78,094.64 पर बंद हुआ. वहीं एनएसई निफ्टी 66.45 अंक यानी 0.27 फीसदी चढ़कर 24,383.60 के स्तर पर पहुंच गया. यह लगातार तीसरा दिन है जब बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ है.
अगर निफ्टी-50 के प्रमुख शेयरों की बात करें तो बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयर रहे. इन कंपनियों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को ऊपर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली, जिससे ऑटो सेक्टर को मजबूती मिली.
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स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी हुई खरीददारी
बाजार में सिर्फ बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर खरीदारी की. इन दोनों श्रेणियों के शेयरों का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों से भी बेहतर रहा, जिससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों की दिलचस्पी व्यापक बाजार में बनी हुई है. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑटो और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा बढ़त वाले सेक्टर रहे. दूसरी ओर निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी में हल्की कमजोरी देखने को मिली और ये दोनों सेक्टर बाजार की रफ्तार से पीछे रहे.
कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए सकारात्मक रहा. वित्तीय और ऑटो शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी, जबकि व्यापक बाजार में भी उत्साह बना रहा. आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी.