सेसेंक्स 650 अंक टूटा, निफ्टी 23200 के नीचे! ये है शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई जिससे बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा टूटे.
मुंबई: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण निवेशकों ने जमकर बिकवाली की.
सुबह करीब 10:20 बजे बीएसई सेंसेक्स लगभग 600 अंक टूटकर 73,645 के स्तर पर आ गया जबकि एनएसई निफ्टी 23,200 के स्तर से नीचे फिसल गया. बाजार में चारों तरफ कमजोरी का माहौल रहा जिसमें बैंकिंग, फाइनेंशियल और आईटी सेक्टर के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा. इसके साथ ही छोटे और मझोले शेयरों पर भी भारी दबाव देखा गया.
गिरावट के मुख्य कारण
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल- बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल के दामों में अचानक आई तेजी है. इजरायल और लेबनान के बीच जारी सैन्य टकराव के बाद ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल दागने से पश्चिम एशिया में तनाव बेहद बढ़ गया है. इसके बाद ब्रेंट क्रूड के दाम तेजी से बढ़े हैं. निवेशकों को डर है कि इस टकराव से दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुक सकती है और आने वाले समय में ईंधन महंगा बना रह सकता है.
वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने इस तनाव ने निवेशकों को डरा दिया है. हालांकि खबरों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल से अपील की है कि वह ईरान के इस मिसाइल हमले का बहुत आक्रामक जवाब न दे ताकि शांति बहाली के राजनयिक प्रयासों को झटका न लगे. इसके बावजूद निवेशकों के मन में यह आशंका बनी हुई है कि हालात बिगड़ने से ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता आ सकती है.
दुनिया भर के बाजारों में मंदी- भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक मंदी का भी सीधा असर पड़ा. जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हांगकांग समेत एशिया के प्रमुख बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई. खासकर टेक कंपनियों के शेयरों में जमकर बिकवाली हुई. निवेशकों को डर है कि एआई के दम पर बाजारों में आ रही तेजी अब थम सकती है. इससे पहले अमेरिकी बाजार भी भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे जिसका असर एशियाई बाजारों पर दिखा.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली- विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना भी एक बड़ी वजह रहा. विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकालकर विदेशी टेक और एआई कंपनियों में लगा रहे हैं. लगातार हो रहे इस फंड आउटफ्लो ने घरेलू शेयर बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया है.
रुपया भी हुआ कमजोर
शेयर बाजार की इस गिरावट के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर पड़ गया. मजबूत होता डॉलर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और दुनिया भर में छाई अनिश्चितता रुपये के गिरने की मुख्य वजह रहे. रुपये के कमजोर होने से देश में आयात होने वाली चीजें महंगी होने का खतरा बढ़ जाता है जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाता है.
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का डर
निवेशक इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि अमेरिका में ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंची रह सकती हैं. वहां के मजबूत आर्थिक आंकड़ों और रोजगार की बेहतर रिपोर्ट के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व मौद्रिक नीति को और सख्त कर सकता है. आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने से शेयर बाजार का आकर्षण कम हो जाता है जिससे वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ जाती है.
कुल मिलाकर कहें तो कच्चे तेल के बढ़ते दाम, युद्ध के हालात, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, वैश्विक बाजारों की मंदी और ब्याज दरों की चिंता इन सबने मिलकर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार को बड़ा झटका दिया है.