सेंसेक्स 800 पॉइंट लुढ़का, निफ्टी 25,500 के नीचे; आईटी शेयरों में भारी बिकवाली से निवेशकों में हड़कंप

मंगलवार को सेंसेक्स 730 अंक और निफ्टी 230 अंक गिरकर 25,500 के नीचे आ गया. आईटी शेयरों में तेज बिकवाली, रुपये की कमजोरी और वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों से घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट आई.

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Kuldeep Sharma

मुंबई: मंगलवार सुबह भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखी गई. सेंसेक्स करीब 730 अंक और निफ्टी 230 अंक लुढ़ककर महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे आ गया. आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया.

वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख और घरेलू स्तर पर रुपये की गिरावट ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया. सुबह 9:50 बजे तक सेंसेक्स 82,564 पर और निफ्टी 25,482 पर कारोबार कर रहा था. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है, लेकिन फिलहाल दबाव बना हुआ है.

आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली

निफ्टी आईटी इंडेक्स सुबह 9:30 बजे तक 2.84 प्रतिशत टूट गया, जो पूरे बाजार में सबसे ज्यादा गिरावट वाला सेक्टर बना. वजह है ग्लोबल एआई टूल्स से जुड़ी नई खबरें. एन्थ्रोपिक कंपनी के क्लॉड कोड टूल्स के दावे से पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम अपग्रेड करने की लागत और जटिलता कम होने की आशंका बढ़ी. इससे आईटी कंपनियों के भविष्य के ऑर्डर पर सवाल उठे और निवेशक बिकवाली पर उतर आए. 

रुपया लगातार कमजोर

रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 90.96 पर पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से यह दबाव बढ़ा. घरेलू बाजार की कमजोर शुरुआत ने भी रुपये को और दबाया. हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी से बड़ी गिरावट रुक गई. विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि एफआईआई सपोर्ट से रुपये को और ज्यादा नुकसान नहीं हुआ. 

वैश्विक बाजारों का कमजोर रुख

एशियाई बाजारों में सुस्ती छाई रही. अमेरिकी बाजार रात भर गिरावट के साथ बंद हुए. ट्रंप ने नए व्यापार समझौतों को छोड़ने वाले देशों पर सख्त चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद वे अन्य व्यापार कानूनों के तहत ज्यादा ड्यूटी लगा सकते हैं. इस वजह से वैश्विक निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा.

बाजार में आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि आईटी सेक्टर की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता से दबाव बना रहेगा. लेकिन मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़े और एफआईआई की खरीदारी से बाजार में उछाल भी आ सकता है. निवेशकों को सतर्क रहने और लंबी अवधि की सोच रखने की सलाह दी जा रही है. बाजार अभी अस्थिर है, लेकिन बड़े सुधार की उम्मीद भी बनी हुई है.