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India Daily

Salary Hike 2027: अगले साल 9.1% तक बढ़ सकती है सैलरी, NBFC, एनर्जी और रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा इंक्रीमेंट की उम्मीद

एऑन के सर्वे के अनुसार, 2027 में भारत में औसतन 9.1% सैलरी बढ़ सकती है. NBFC, एनर्जी, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा इंक्रीमेंट का अनुमान है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
Salary Hike 2027: अगले साल 9.1% तक बढ़ सकती है सैलरी, NBFC, एनर्जी और रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा इंक्रीमेंट की उम्मीद
Courtesy: pinterest

भारत में नौकरी करने वाले लोगों के लिए अगले साल अच्छी खबर आ सकती है. ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म एऑन (Aon) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 में कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी औसतन 9.1% बढ़ा सकती हैं. वर्ष 2026 में वेतन वृद्धि का औसत अनुमान 9% था. हालांकि, यह एक सर्वे आधारित अनुमान है, वास्तविक बढ़ोतरी कंपनी, कर्मचारी के प्रदर्शन और पद के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.

45 इंडस्ट्री को सर्वे में किया गया शामिल

एऑन ने अपनी रिपोर्ट 'Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27' तैयार करने के लिए 45 उद्योगों की 1,200 से अधिक कंपनियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है. रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तनाव और परिचालन लागत बढ़ने के बावजूद भारत में घरेलू खपत, कंपनियों के निवेश और निर्यात में वृद्धि से कारोबारी भरोसा बना हुआ है. इससे कंपनियों को कर्मचारियों पर खर्च करने के साथ लागत नियंत्रित रखने में मदद मिल रही है.

NBFC सेक्टर में सबसे ज्यादा इंक्रीमेंट की उम्मीद

रिपोर्ट में 2027 के लिए कुछ प्रमुख क्षेत्रों में वेतन वृद्धि का अनुमान इस प्रकार है:

- NBFC (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां): 10.1%
- एनर्जी सेक्टर: 9.9%
- रियल एस्टेट: 9.8%
- इंफ्रास्ट्रक्चर: 9.8%
- सभी सेक्टर का औसत: 9.1%

इन अनुमानों के अनुसार, NBFC क्षेत्र में वेतन वृद्धि की दर राष्ट्रीय औसत से एक प्रतिशत अंक अधिक रह सकती है. एनर्जी, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी औसत से ज्यादा इंक्रीमेंट मिलने की संभावना जताई गई है.

2026 के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी

एऑन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में कंपनियों ने औसतन 9% वेतन वृद्धि की थी, जबकि 2027 के लिए यह अनुमान 9.1% है. यानी अनुमानित बढ़ोतरी की दर में केवल 0.1 प्रतिशत अंक का अंतर है. इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां वेतन वृद्धि को लेकर सतर्क रहते हुए कर्मचारियों को बेहतर भुगतान देने की कोशिश कर सकती हैं.

अब हर कर्मचारी को एक जैसा इंक्रीमेंट नहीं

एऑन के टैलेंट सॉल्यूशंस इंडिया में पार्टनर और रिवॉर्ड्स कंसल्टिंग लीडर रूपांक चौधरी के अनुसार, कंपनियां वेतन बढ़ाने के लिए अब ज्यादा लक्षित रणनीति अपना रही हैं. वेतन संबंधी फैसलों में केवल कुल खर्च नहीं, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि किन कर्मचारियों, जरूरी कौशल और महत्वपूर्ण पदों पर निवेश करने से कारोबार को अधिक फायदा मिलेगा.

रिपोर्ट में मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में गैर-योग्यता आधारित वेतन समायोजन (नॉन-मेरिट एडजस्टमेंट) बढ़ने का भी उल्लेख है. इसमें ऐसे बदलाव शामिल हैं जो केवल कर्मचारी के प्रदर्शन पर आधारित नहीं होते, बल्कि बाजार में वेतन के स्तर, खास कौशल की उपलब्धता और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखकर किए जाते हैं.

कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर बढ़ी

एऑन की रिपोर्ट में कंपनियों के सामने कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती भी सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर यानी एट्रिशन रेट 2026 में बढ़कर 18% हो गया. इससे पहले यह 2025 में 16.2% और 2024 में 17.1% था.

एट्रिशन रेट बताता है कि एक निश्चित अवधि में कितने कर्मचारी कंपनी छोड़कर चले गए. 2025 में इसमें गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन 2026 में यह तीनों वर्षों के आंकड़ों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. ऐसे में कंपनियों को कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतन और बेहतर अवसर देने के साथ अपने खर्चों पर भी नियंत्रण रखना होगा.

कंपनियों में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उत्पादकता टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा है. 2025 में ऐसे टूल्स अपनाने वाली कंपनियों का अनुपात 46.1% था, जो 2026 में बढ़कर 56% हो गया. सर्वे में शामिल सभी प्रमुख जॉब कैटेगरी में इन टूल्स का इस्तेमाल बढ़ने की बात कही गई है.

AI के बढ़ते उपयोग के बीच कंपनियां कर्मचारियों के कौशल, काम करने के तरीकों और उत्पादकता पर अधिक ध्यान दे रही हैं. इसका असर वेतन संबंधी फैसलों पर भी पड़ रहा है, जहां जरूरी कौशल और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने को प्राथमिकता मिल रही है.

वेज कोड के असर का आकलन जरूरी

एऑन के टैलेंट सॉल्यूशंस इंडिया में एसोसिएट पार्टनर अमित कुमार ओटवानी के अनुसार, वेज कोड के मामले में कंपनियों को केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्हें कर्मचारियों और अपनी लागत पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव का भी आकलन करना चाहिए. इसके साथ ही कर्मचारियों के साथ प्रभावी संवाद बनाए रखना भी जरूरी है.