रुपया पहली बार 93 के पार लुढ़का! डॉलर के सामने ऐतिहासिक गिरावट, देश में बढ़ेगी महंगाई?
भारतीय रुपया पहली बार 93 के पार पहुंचकर ऐतिहासिक गिरावट पर आ गया. तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव के कारण मुद्रा पर दबाव बढ़ा, जिससे महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर असर की आशंका है.
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती सामने आई है, जहां रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. 19 मार्च को रुपये ने 93.24 का स्तर छूते हुए नया रिकॉर्ड बनाया, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई है. मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है. इसका सीधा असर भारत पर पड़ा है, जहां आयात लागत बढ़ने और महंगाई के दबाव की आशंका जताई जा रही है.
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
गुरुवार को भारतीय रुपया 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 93.24 प्रति डॉलर तक कमजोर हो गया. इससे पहले बुधवार को यह 92.63 के स्तर तक पहुंचा था. अमेरिका-ईरान तनाव शुरू होने के बाद से रुपया करीब 2 प्रतिशत तक गिर चुका है. यह गिरावट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की चिंता भी साफ दिखाई दे रही है.
तेल कीमतों का बढ़ता दबाव
मध्य पूर्व में ऊर्जा ढांचे पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं. हालांकि बाद में कुछ नरमी आई, लेकिन ऊंचे स्तर का असर बना हुआ है. भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति गंभीर है. तेल महंगा होने से न सिर्फ आयात बिल बढ़ता है, बल्कि इसका असर सीधे महंगाई और आम लोगों के खर्च पर भी पड़ता है.
विदेशी निवेशकों की निकासी
मार्च के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है. यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ी मासिक निकासी मानी जा रही है. डॉलर की मजबूती और वैश्विक जोखिमों के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. इसका सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है, जिससे इसकी कमजोरी और बढ़ गई है.
महंगाई और विकास पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है. अनुमान है कि हर 10 डॉलर की वृद्धि से महंगाई दर में करीब 0.5 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है. हालांकि आर्थिक वृद्धि पूरी तरह प्रभावित नहीं होगी और भविष्य में 7 प्रतिशत के आसपास रह सकती है. फिर भी मौजूदा हालात में रुपये पर दबाव और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है.