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India Daily

ऑल टाइम लो पर पहुंचा रुपया, जानें क्यों मजबूत हो रहा डॉलर; क्या है बाकी मुद्राओं का हाल?

रुपया एक बार फिर से ऑल टाइम लो पर पहुंच गया है. वहीं वैश्विक बाजार में डॉलर की पकड़ और भी ज्यादा मजबूत होती जा रही है. ईरान-अमेरिका वॉर और क्रूड ऑयल सप्लाई ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर दिया है.

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Edited By: Shanu Sharma
ऑल टाइम लो पर पहुंचा रुपया, जानें क्यों मजबूत हो रहा डॉलर; क्या है बाकी मुद्राओं का हाल?
Courtesy: AI

अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर भारतीय रुपया पर पड़ रहा है. जैसे-जैसे कच्चे तेल के कीमत बढ़ रहे हैं, उतने ही तीजे से रुपया नीचे आ रहा है. डॉलर के मुकाबले रुपया अपने ऑल टाइम लो आ चुका है. शुरुआती कारोबार में रुपया 20 पैसे की गिरावट के साथ 95.43 पर पहुंच गया. हालांकि इससे पहले सोमवार को रुपया 95.23 के निचले स्तर पर बंद हुआ था.

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका, ईरान और मिडिल ईस्ट के कई देशों में बढ़ रहे तनाव ने एक बार फिर से वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है. इसकी वजह से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर कदम बढ़ाया है, जिसके कारण डॉलर मजबूत साबित हो रहा है.

वैश्विक स्तर पर बढ़ी हलचल

विश्व में चल रहे इस उथल-पुथल के कारण ना केवल भारत बल्कि कई अन्य देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है. जो भी देश अपने देश के कच्चे तेल की जरूरत के लिए दूसरे  पर निर्भर हैं, उनपर प्रभाव पड़ रहा है. भारत के साथ-साथ इंडोनेशिया और फिलीपींस के मुद्राओं में भी भारी गिरावट देखने को मिली है.

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध ज्यादा लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर दूसरे देशों में देखने को मिल सकता है. वहीं डॉलर की बात करें तो यह 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.51 पर पहुंच गया. विदेशी बैंको में डॉलर की जमा राशि अब रिकॉर्ड 14.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है. अगर पिछले पांच सालों की बात करें तो यह आंकड़ा 220 प्रतिशत तक बढ़ा है.

विदेशी बैंकों में डॉलर का दबदबा

डॉलर के अलावा अन्य मुद्राओं की बात करें तो विदेशी बैंको में यूरो की जमा राशि केवल 3.5 ट्रिलियन डॉलर है. वहीं अमेरिका के फेडरल रिजर्व और घरेलू वाणिज्यिक बैंकों में कुल जमा 19 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा है. विदेशी बैंकों में डॉलर जमा, अमेरिकी घरेलू जमा का करीब 43 प्रतिशत है. दुनिया की कोई दूसरी मुद्रा इस स्तर की लोकप्रियता नहीं है. जिससे यह साफ होता है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग बढ़ी हुई है.

विश्लेषकों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता है तो रुपया पर दबाव और भी ज्यादा बढ़ सकता है. सरकार और रिजर्व बैंक की नजर बाजार की स्थिति पर बनी हुई है, कच्चे तेल की कीमतों पर नियंत्रण और विदेशी मुद्रा भंडार का सही उपयोग इस चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.