RBI के बड़े ऐलानों के बाद भी शांत रहा शेयर बाजार, आखिर किस बात से डर रहे निवेशक?
आरबीआई के नीतिगत कदमों से देश में 30-40 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आ सकता है. जिससे रुपया मजबूत होगा. इसके बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर मानसून के डर से निफ्टी सपाट बंद हुआ है.
मुंबई: जब देश का केंद्रीय बैंक और सरकार मिलकर अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए बड़े बड़े एलान कर दें तो शेयर बाजार में रॉकेट जैसी तेजी की उम्मीद होती है. लेकिन इस बार कहानी में एक दिलचस्प ट्विस्ट आ गया. तमाम बड़े और सकारात्मक फैसलों के बावजूद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक 'निफ्टी' अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ और लगभग फ्लैट बंद हुआ. बाजार की इस खामोशी ने साफ कर दिया कि निवेशकों के मन में अभी भी कुछ बड़े खतरों को लेकर डर बना हुआ है.
देश में डॉलर लाने के लिए आरबीआई का अहम फैसला
दरअसल रिजर्व बैंक ने देश में विदेशी डॉलर की आमद बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इनमें विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड खरीदना आसान बनाना, सरकारी कंपनियों को विदेशों से फंड जुटाने के लिए बढ़ावा देना और बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा आकर्षित करने की विशेष सुविधाएं शामिल हैं. इसके साथ ही सरकार ने टैक्स में भी छूट दी है ताकि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत की तरफ खिंचे चले आएं.
जानकारों का मानना है कि इन फैसलों से अगले कुछ महीनों में भारत में 30 से 40 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आ सकता है. यह पैसा लंबे समय तक देश में रहेगा जिससे रुपये को मजबूती मिलेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा.
अच्छी खबरों पर भी क्यों शात रहा बाजार?
अब सवाल यह उठता है कि इतनी अच्छी खबरों के बाद भी बाजार झूम क्यों नहीं उठा? इसकी सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश में माल ढुलाई और सामान बनाने की लागत बढ़ जाती है जिससे महंगाई बढ़ती है और आम जनता की जेब में खर्च करने के लिए पैसे कम बचते हैं.
आरबीआई का भी मानना है कि देश के सामने असली चुनौती ग्राहकों की कमी नहीं बल्कि बढ़ती लागत है. इसीलिए केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव न करते हुए 'देखो और इंतजार करो' की नीति अपनाई है. हालांकि आरबीआई ने देश की तरक्की को लेकर भरोसा जताया है भले ही उसने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% और महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है.
मौसम के मिजाज से बढ़ा सिरदर्द
इसके अलावा मौसम का मिजाज भी एक बड़ा सिरदर्द है. अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका से खेती पर असर पड़ सकता है जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी होने का डर है. कुल मिलाकर जब तक कच्चे तेल की कीमतें काबू में नहीं आतीं और मानसून की स्थिति साफ नहीं होती तब तक निवेशक जश्न मनाने के बजाय फूंक-फूंक कर कदम रखना ही बेहतर समझ रहे हैं.
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