RBI Dividend: मालामाल हो गई केंद्र सरकार! आरबीआई ने दिया रिकॉर्ड 2.7 लाख करोड़ का डिविडेंड
डिविडेंड में इस उल्लेखनीय वृद्धि का मुख्य कारण आरबीआई की विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय भागीदारी रही. जनवरी 2025 में आरबीआई एशियाई केंद्रीय बैंकों में सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार विक्रेता था.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को 2.7 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर किया है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इतनी मोटी रकम उच्च डॉलर बिक्री, विदेशी मुद्रा लाभ और ब्याज आय में निरंतर वृद्धि के कारण संभव हुई. एसबीआई की रिपोर्ट में बताया, “यह सरप्लस पेमेंट मजबूत डॉलर बिक्री, उच्च विदेशी मुद्रा लाभ और ब्याज आय में स्थिर वृद्धि से प्रेरित है.”
रिकॉर्ड डिविडेंड से मालामाल हो गई सरकार
डिविडेंड में इस उल्लेखनीय वृद्धि का मुख्य कारण आरबीआई की विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय भागीदारी रही. जनवरी 2025 में आरबीआई एशियाई केंद्रीय बैंकों में सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार विक्रेता था. सितंबर 2024 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 704 बिलियन डॉलर था. रुपये को स्थिर करने के लिए आरबीआई ने भारी मात्रा में डॉलर बिक्री की, जिससे विदेशी मुद्रा लाभ बढ़ा. फरवरी 2025 तक सकल डॉलर बिक्री 371.6 बिलियन डॉलर थी, जो पिछले वर्ष के 153 बिलियन डॉलर से कहीं अधिक थी.
रुपये की प्रतिभूतियों से आय
आरबीआई ने रुपये की प्रतिभूतियों से भी कमाई की. मार्च 2025 तक, इसकी रुपये प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 1.95 लाख करोड़ से बढ़कर 15.6 लाख करोड़ रुपए हो गई. हालांकि, सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) की यील्ड में कमी से मार्क-टू-मार्केट (एमटीएम) लाभ प्रभावित हुआ, लेकिन कुल ब्याज आय में निरंतर वृद्धि हुई.
राजकोषीय घाटे में आएगी कमी
रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के इस सरप्लस ट्रांसफर से केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 4.5% से घटकर 4.2% तक कम हो सकता है, जो 20 से 30 आधार अंकों की कमी है. वित्त वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में आरबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों से 2.56 लाख करोड़ रुपए की लाभांश आय का अनुमान था. इस हस्तांतरण के बाद यह राशि बजट अनुमानों से अधिक होगी.
क्या अधिक सरप्लस संभव था?
रिपोर्ट में कहा गया कि यदि आरबीआई ने जोखिम बफर को नहीं बढ़ाया होता, तो लाभांश 3.5 लाख करोड़ से अधिक हो सकता था. केंद्रीय बैंक ने भविष्य के जोखिमों से बचाव के लिए आकस्मिक जोखिम बफर को 7.5% से 4.5% के दायरे में रखा. यह लाभांश अद्यतन आर्थिक पूंजी ढांचे (ईसीएफ) के आधार पर तय किया गया, जिसे आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने 15 मई 2025 को मंजूरी दी थी.