गर्मी ने बढ़ाई बिजली की टेंशन! 5 साल में सबसे ज्यादा पहुंची डिमांड, 51 प्लांटों में कोयला संकट

अगस्त में भीषण गर्मी के बीच भारत की बिजली मांग पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. पीक डिमांड 258.27 गीगावाट रही, जबकि 51 ताप विद्युत संयंत्रों में कोयला भंडार गंभीर स्तर पर पहुंच गया.

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Kuldeep Sharma

भारत में अगस्त के दौरान गर्मी ने बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया. बिजली की अधिकतम मांग सालाना आधार पर 12.4 प्रतिशत बढ़ी और खपत भी तेज रही. इसी बीच ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार घटने से उत्पादन और आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है. 

पांच साल के उच्चतम स्तर पर बिजली मांग

अगस्त 2026 में भारत की अधिकतम पूरी की गई बिजली मांग 258.27 गीगावाट रही, जो पिछले साल के 229.72 गीगावाट से 12.4 प्रतिशत अधिक है. राष्ट्रीय लोड डिस्पैच सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2024 में यह मांग 216.69 गीगावाट, 2023 में 236.60 गीगावाट और 2022 में 194.95 गीगावाट थी. इस तरह इस साल अगस्त की मांग पांच साल की अवधि में सबसे ज्यादा दर्ज हुई.

रिकॉर्ड गर्मी ने बढ़ाई बिजली की जरूरत

बिजली मांग में उछाल के पीछे अगस्त की असामान्य गर्मी बड़ी वजह रही. भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक अगस्त 2026 देश में 1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त रहा. इस महीने औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1991-2020 के सामान्य स्तर से 0.67 डिग्री अधिक है. औसत न्यूनतम तापमान भी 24.36 डिग्री सेल्सियस के साथ अगस्त का रिकॉर्ड उच्च स्तर रहा. गर्म रातों के कारण एयर कंडीशनर और कूलर लंबे समय तक चलते रहे.


51 बिजली संयंत्रों में कोयले का संकट

बढ़ती मांग के बीच ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त तक 51 संयंत्रों को गंभीर रूप से कम कोयला भंडार वाली श्रेणी में रखा गया. 25 अगस्त को ऐसे संयंत्रों की संख्या 45 थी. कुल कोयला भंडार करीब 2.912 करोड़ टन रहा, जो निर्धारित जरूरत का सिर्फ 47.8 प्रतिशत है और लगभग 9.3 दिनों की आपूर्ति के बराबर है.

बिजली खपत भी तेजी से बढ़ी

अगस्त में देश की कुल बिजली खपत 12.85 प्रतिशत बढ़कर 169.01 अरब यूनिट पहुंच गई. हालांकि यह मांग मई 2026 में दर्ज 270.82 गीगावाट के अब तक के सर्वाधिक स्तर से कम रही. फिर भी लगातार ऊंची मांग ने बिजली उत्पादकों और ग्रिड संचालकों के लिए चुनौती बढ़ा दी है. खासकर शाम के समय सौर ऊर्जा उत्पादन में तेज गिरावट के दौरान पर्याप्त बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन क्षमता और कोयले की उपलब्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा.