Petrol-Diesel Price: तेल की कीमतों में लगी आग, ट्रंप ने लोगों से क्यों कहा सब्र रखें? भारत में जानें ताजा भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारत में 28 अक्टूबर को पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बताए गए हैं.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने के बीच भारत में 28 अक्टूबर को पेट्रोल और डीजल के दाम में बदलाव नहीं होने की जानकारी दी गई है. सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी दरों के मुताबिक, फिलहाल वाहन चालकों को राहत मिली हुई है. हालांकि, वैश्विक बाजार में जारी उथल-पुथल के कारण आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है.
धैर्य रखें-ट्रंप
दूसरी ओर, अमेरिका में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लोगों से धैर्य रखने की अपील की है. टेक्सास के कॉर्पस क्रिस्टी में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा कि लंबे समय में फायदा हासिल करने के लिए कुछ समय तक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. तेल बाजार में तेजी के पीछे मध्य पूर्व का तनाव, तेल ठिकानों पर हमलों की आशंका और राजनीतिक घटनाक्रम अहम भूमिका निभा रहे हैं.
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, जानें ताजा भाव
28 अक्टूबर को दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बताया गया है. पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल 88.66 रुपये और डीजल 84.56 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, आंध्र प्रदेश के चित्तूर में पेट्रोल 118.34 रुपये और डीजल 106.06 रुपये प्रति लीटर बताया गया है. अलग-अलग शहरों में कीमतों का अंतर स्थानीय करों और अन्य शुल्कों की वजह से होता है.
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पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल
खबर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, म्यांमार में पेट्रोल 96.10 प्रतिशत और डीजल 81.87 प्रतिशत महंगा हुआ है. संयुक्त अरब अमीरात में पेट्रोल की कीमत 83.7 प्रतिशत और डीजल की कीमत 90.50 प्रतिशत बढ़ने की जानकारी दी गई है. पाकिस्तान में भी पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं. भारत में मई 2026 में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद से दरों को लेकर लोगों की नजर बनी हुई है.
इजरायल की राजनीति से तेल बाजार में हलचल
इजरायल में राजनीतिक घटनाक्रम भी कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है. खबर में ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया गया है कि विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मामूली बढ़त बनाए हुए थे. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने और संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर दिए गए बयानों से क्षेत्रीय तनाव की चिंता बनी हुई है. बाजार की नजर इस बात पर भी है कि राजनीतिक बदलाव का अमेरिका-ईरान संघर्ष पर क्या असर पड़ता है.
सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमले से बढ़ी चिंता
सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है. खबर के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों के हमले के बाद रास तनूरा क्षेत्र में आग लगने की सूचना सामने आई. यह इलाका देश के प्रमुख तेल निर्यात केंद्रों में शामिल है. यदि तेल उत्पादन या निर्यात व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. इससे कीमतों में और तेजी आने का जोखिम बना रहेगा.