Onion Price: आखिर सितंबर-अक्टूबर में क्यों महंगा होता है प्याज, जानें वजह
प्याज की कीमतें फसल को हुए नुकसान, पुराने स्टॉक में कमी और मंडियों में आवक घटने के कारण बढ़ी हैं. सितंबर-अक्टूबर में फसल चक्र के चलते प्याज के दाम अक्सर दबाव में आते हैं.
प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. दिल्ली से लेकर रांची तक कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें पिछले एक साल की तुलना में करीब दोगुनी या उससे ज्यादा हो गई हैं. उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 21 सितंबर 2026 को प्याज की औसत खुदरा कीमत 54.23 रुपये प्रति किलो पहुंच गई. एक महीने पहले यही कीमत 40.79 रुपये प्रति किलो थी.
थोक बाजार में भी प्याज के भाव में तेज बढ़ोतरी हुई है. 21 सितंबर को प्याज का औसत थोक भाव 4,615.98 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि एक साल पहले यह 3,299.85 रुपये प्रति क्विंटल था. इस तरह सालाना आधार पर थोक कीमत में करीब 135 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. करीब 10 महीने तक अपेक्षाकृत स्थिर रहने के बाद पिछले दो महीनों में प्याज की कीमतों में तेजी आई है.
दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े प्याज के दाम
अलग-अलग शहरों में प्याज की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है. दिल्ली में एक साल पहले प्याज करीब 32 रुपये किलो था, जो अब 53 रुपये किलो पहुंच गया है. मुंबई में प्याज का भाव 30 रुपये से बढ़कर 58 रुपये और चेन्नई में 30 रुपये से बढ़कर 60 रुपये किलो हो गया है. रांची में भी कीमत 25 रुपये से बढ़कर 57 रुपये किलो तक पहुंच गई है.
Also Read
महाराष्ट्र की फसल को बारिश से नुकसान
प्याज महंगा होने की एक बड़ी वजह महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज की फसल को हुआ नुकसान है. मार्च में हुई बेमौसम बारिश से फसल प्रभावित हुई थी. इसके अलावा केंद्रीय एजेंसियों के पास मौजूद प्याज के स्टॉक में भी करीब 30 प्रतिशत प्याज खराब होने की बात सामने आई है.
विदेशी बाजारों में भारतीय प्याज की मांग कमजोर रहने और बांग्लादेश में उत्पादन बढ़ने से दूसरे बाजारों में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है. हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्याज की कीमतों में बहुत बड़ी तेजी की संभावना कम बताई जा रही है.
सितंबर-अक्टूबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में सितंबर और अक्टूबर के आसपास तेजी का संबंध इसके फसल चक्र से है. रबी सीजन की प्याज की फसल मुख्य रूप से मार्च-अप्रैल से बाजार में आनी शुरू होती है. इस फसल का एक बड़ा हिस्सा भंडारण के लिए रखा जाता है. इसके बाद खरीफ सीजन की नई फसल बाजार में आने तक काफी हद तक पुराने स्टॉक से ही मांग पूरी होती है. जैसे-जैसे भंडारित प्याज कम होता है और नई फसल की आवक पर्याप्त नहीं रहती, बाजार में उपलब्धता घटने लगती है. इसका असर सीधे प्याज की कीमतों पर पड़ता है.
कब सस्ता होगा प्याज?
पिछले एक सप्ताह से प्याज के भाव लगभग स्थिर बने हुए हैं. फिलहाल अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की मांग मुख्य रूप से बीज कंपनियों की ओर से बताई जा रही है. इन कंपनियों की खरीद पूरी होने के बाद बाजार में मांग का दबाव कम होने की उम्मीद है. ऐसे में प्याज के दाम 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक कम हो सकते हैं. हालांकि, कीमतों में वास्तविक गिरावट नई फसल की आवक, मौसम और मंडियों में प्याज की उपलब्धता पर निर्भर करेगी.