एक भैंस या 10 बकरियां? जानें कौन-सा बिजनेस देगा ज्यादा फायदा
भैंस पालन में मुख्य कमाई दूध की नियमित बिक्री से होती है, जबकि बकरी पालन में बच्चों और बकरियों की बिक्री से कमाई का रास्ता बनता है. भैंस के लिए दूध का बाजार और चारे की व्यवस्था जरूरी है, वहीं बकरी पालन में झुंड बढ़ाने की संभावना रहती है.
अगर आप गांव या छोटे शहर में पशुपालन को बिजनेस के तौर पर शुरू करना चाहते हैं, तो आपके सामने एक सवाल जरूर आता है. एक अच्छी दूध देने वाली भैंस पालना ज्यादा फायदेमंद है या 10 बकरियां रखना. दोनों विकल्पों में कमाई की संभावना है लेकिन निवेश, खर्च, देखभाल और कमाई का तरीका काफी अलग है.
भैंस पालन में सबसे बड़ा फायदा नियमित दूध की बिक्री है. मान लीजिए एक भैंस रोज 8 से 10 लीटर दूध देती है और स्थानीय बाजार में दूध का भाव 60 रुपये प्रति लीटर है. ऐसे में 10 लीटर दूध बेचने पर करीब 600 रुपये रोज की बिक्री हो सकती है. महीने के हिसाब से यह रकम करीब 18 हजार रुपये तक पहुंच सकती है.
कितना होता है फायदा?
हालांकि यह पूरी रकम मुनाफा नहीं है. इसमें हरा और सूखा चारा, दाना, पानी, टीकाकरण, इलाज और दूसरी देखभाल का खर्च घटाना होगा. इसके अलावा भैंस पूरे साल एक समान मात्रा में दूध नहीं देती और ड्राई पीरियड भी आता है. इसलिए भैंस खरीदने से पहले दूध की क्षमता और स्थानीय बाजार का भाव जरूर जांचना चाहिए.
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10 बकरियों से कमाई कैसे होगी?
बकरी पालन में कमाई का मुख्य जरिया दूध के बजाय बकरी और उसके बच्चों की बिक्री हो सकता है. स्वस्थ मादा बकरियों से समय के साथ बच्चे मिलते हैं, जिन्हें बड़ा करके बाजार में बेचा जा सकता है. इससे धीरे-धीरे झुंड बढ़ाने का मौका मिलता है. बकरी के मांस की कई इलाकों में अच्छी मांग रहती है और त्योहारों तथा शादी-ब्याह के समय मांग बढ़ सकती है लेकिन यहां भी चारा, शेड, दवा, टीकाकरण और साफ-सफाई का खर्च होता है. बीमारी फैलने पर एक साथ कई बकरियां प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए देखभाल में लापरवाही नुकसान करा सकती है.
निवेश और कमाई में क्या अंतर है?
एक अच्छी दूध देने वाली भैंस खरीदने में बड़ी रकम एक ही पशु पर लगती है. इसके बदले दूध से नियमित कमाई का रास्ता बनता है. वहीं 10 बकरियों में निवेश कई पशुओं में बंट जाता है. बकरी पालन में पशुओं की संख्या बढ़ने के साथ भविष्य में बिक्री का आधार भी बढ़ सकता है.
यानी भैंस पालन का मॉडल मुख्य रूप से दूध की नियमित बिक्री पर आधारित है, जबकि बकरी पालन में बच्चों और पशुओं की बिक्री से कमाई का चक्र चलता है. इसलिए दोनों की तुलना केवल खरीद कीमत के आधार पर करना सही नहीं होगा.
चारा और बाजार सबसे महत्वपूर्ण
पशुपालन शुरू करने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपके पास चारे की क्या व्यवस्था है. अगर अपनी जमीन पर हरा चारा उगाया जा सकता है, तो खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. वहीं पूरा चारा बाजार से खरीदने पर कुल लागत बढ़ सकती है.
इसके साथ ही बाजार की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है. अगर आपके इलाके में दूध की नियमित मांग है और डेयरी या ग्राहक आसानी से मिल जाते हैं, तो भैंस से नियमित आय का रास्ता बन सकता है. दूसरी ओर, अगर आपके क्षेत्र में बकरी और बकरे की अच्छी मांग है, तो बकरी पालन पर विचार किया जा सकता है.
आखिर किसे चुनें?
अगर आपके पास चारा-पानी की अच्छी व्यवस्था है, दूध बेचने का पक्का बाजार है और आप नियमित कमाई वाला मॉडल चाहते हैं, तो भैंस पालन आपके लिए एक विकल्प हो सकता है. वहीं अगर आप पशुओं की संख्या बढ़ाकर आगे चलकर उनकी बिक्री से कमाई करना चाहते हैं और स्थानीय बाजार में बकरियों की मांग अच्छी है, तो 10 बकरियों का मॉडल उपयोगी हो सकता है.