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India Daily

भारत के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में जबरदस्त उछाल, 13% बढ़कर हुआ 12.1 लाख करोड़ के पार

चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 17 सितंबर तक भारत का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 13% बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इसमें कॉर्पोरेट टैक्स और एडवांस टैक्स का अहम योगदान रहा.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
भारत के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में जबरदस्त उछाल, 13% बढ़कर हुआ 12.1 लाख करोड़ के पार
Courtesy: AI generated image

चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में 17 सितंबर तक भारत का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से एडवांस टैक्स में बढ़ोतरी के कारण दर्ज की गई है.

कॉर्पोरेट और पर्सनल टैक्स का प्रदर्शन 

इस अवधि में कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन 19.48 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. वहीं, व्यक्तिगत आयकर और एचयूएफ (HUF) से मिलने वाले नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स में 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो 6.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही. इसके अलावा, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) कलेक्शन 53 प्रतिशत बढ़कर 40,214 करोड़ रुपये हो गया.

ग्रॉस कलेक्शन और रिफंड

1 अप्रैल से 17 सितंबर के दौरान ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 14.32 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा. इस दौरान सरकार द्वारा जारी किए गए टैक्स रिफंड में भी 29.19 प्रतिशत की बड़ी उछाल आई, जो बढ़कर 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई.

एडवांस टैक्स में शानदार उछाल

17 सितंबर तक कुल एडवांस टैक्स कलेक्शन 16.18 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.22 लाख करोड़ रुपये रहा. इसमें कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स 18 प्रतिशत बढ़कर 4.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ, जबकि नॉन-कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स 9.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1.06 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया.

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में वृद्धि के मायने क्या

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन (प्रत्यक्ष कर संग्रह) में बढ़ोतरी देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्तीय सेहत से जुड़े कई सकारात्मक संकेत देती है.

मुख्य रूप से direct tax के आंकड़े अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं:

1. मजबूत आर्थिक विकास और कंपनियों का बेहतर मुनाफा

 कॉर्पोरेट टैक्स में वृद्धि का मतलब है कि देश की कंपनियां अच्छा मुनाफा कमा रही हैं, उनका उत्पादन और बिक्री बढ़ रही है.
 एडवांस टैक्स में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि कंपनियों और कारोबारियों को आने वाली तिमाहियों में भी अपनी आय और मुनाफे में निरंतर बढ़त की उम्मीद है.

2. व्यक्तिगत आय और रोजगार में सुधार

 पर्सनल इनकम टैक्स में बढ़ोतरी से पता चलता है कि लोगों की आय बढ़ रही है, नए रोजगार पैदा हो रहे हैं या वेतन में वृद्धि हो रही है. इससे देश में मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति (purchasing power) में मजबूती का संकेत मिलता है.

3. औपचारिक अर्थव्यवस्था (Formal Economy) का विस्तार

 डिजिटल ट्रांजैक्शन, TDS नियमों में सख्ती और टैक्स अनुपालन (tax compliance) बेहतर होने से असंगठित क्षेत्र का हिस्सा औपचारिक अर्थव्यवस्था में बदल रहा है. अधिक लोग और इकाइयां टैक्स दायरे में आ रही हैं.

4. शेयर बाजार और वित्तीय गतिविधियों में तेजी

 STT (Securities Transaction Tax) में बड़ा उछाल यह संकेत देता है कि शेयर बाजार में निवेशकों की भागीदारी, ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेश गतिविधियां बहुत तेज हैं.

5. सरकार के पास विकास कार्यों के लिए अधिक फंड

 टैक्स राजस्व बढ़ने से सरकार का राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) नियंत्रित रहता है. सरकार को बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर), स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए बाजार से कम उधार लेना पड़ता है.