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रिलायंस ने निकाल लिया तेल का तोड़, मोटी कमाई के लिए गैस और ग्रीन केमिकल्स पर लगाया बड़ा दांव

रिलायंस ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि दुनिया भर में तेल की मांग कमजोर पड़ सकती है, जबकि भू-राजनीतिक तनाव सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं. इसी वजह से कंपनी अब केवल पारंपरिक तेल कारोबार पर निर्भर नहीं रहना चाहती और गैस, ग्रीन केमिकल्स और क्लीन एनर्जी सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ा रही है.

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Sagar Bhardwaj

देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने चेतावनी दी है कि वित्त वर्ष 2026-27 यानी FY27 में वैश्विक तेल बाजार बेहद अस्थिर रह सकता है. कंपनी का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, ऊंचे कच्चे तेल के दाम और दुनिया की धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था आने वाले समय में ऊर्जा बाजार को झटका दे सकती है.

ग्रीन केमिकल्स और क्लीन एनर्जी सेक्टर एनर्जी में तेजी से निवेश कर रही कंपनी

रिलायंस ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि दुनिया भर में तेल की मांग कमजोर पड़ सकती है, जबकि भू-राजनीतिक तनाव सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं. इसी वजह से कंपनी अब केवल पारंपरिक तेल कारोबार पर निर्भर नहीं रहना चाहती और गैस, ग्रीन केमिकल्स और क्लीन एनर्जी सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ा रही है.

कंपनी ने साफ किया कि उसने बीते साल कई देशों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर सप्लाई रिस्क कम किया. खासतौर पर मिडिल ईस्ट संकट के दौरान कंपनी ने वैकल्पिक सप्लायर्स की मदद से गुजरात के जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स को लगातार चालू रखा.

भविष्य में यही सेक्टर होंगे ग्रोथ का बड़ा इंजन

रिलायंस का कहना है कि भविष्य में गैस आधारित ईंधन और ग्रीन केमिकल्स की मांग तेजी से बढ़ सकती है. इसी को देखते हुए कंपनी कम प्रदूषण वाले फ्यूल, सस्टेनेबल केमिकल्स और नई ऊर्जा तकनीकों पर फोकस कर रही है. कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में यही सेक्टर उसकी ग्रोथ का बड़ा इंजन बनेंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक बाजार में रिफाइनिंग क्षमता सीमित बनी हुई है, जबकि जियोपॉलिटिकल संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है. इससे तेल कंपनियों की लागत और मुनाफे दोनों पर असर पड़ सकता है.

हालांकि रिलायंस ने भरोसा जताया है कि उसकी विविध स्रोत रणनीति (Diversified Sourcing Strategy), मजबूत रिफायनिंग सिस्टम और ऊर्जा परिवर्तन योजना कंपनी को मुश्किल हालात में भी आगे बनाए रखेंगे. कंपनी अब अपने कारोबार को पारंपरिक तेल मॉडल से निकालकर फ्यूचर एनर्जी कंपनी बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है.