इजरायल-ईरान वॉर से भारत में LPG संकट! जानें कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित, होटलों पर ताला लगने की नौबत
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हुई है. बेंगलुरु, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में होटल-रेस्टोरेंट संकट में हैं. सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है, जिससे व्यावसायिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं.
पश्चिम एशिया में इजरायल-ईरान संघर्ष तेज होने से एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली आपूर्ति बाधित हुई है. इससे कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी हो गई है.
बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में होटल-रेस्टोरेंट संचालक परेशान हैं. सरकार ने घरेलू गैस को प्राथमिकता दी है. कई जगहों पर रेस्टोरेंट बंद होने की आशंका जताई जा रही है. तेल कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाने के निर्देश मिले हैं.
बेंगलुरु में होटल-रेस्टोरेंट संकट
बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति रुक गई है. सोमवार को केवल 10 प्रतिशत होटलों को गैस मिली. मंगलवार शाम तक स्टॉक खत्म होने की आशंका है. कई होटल बंद होने की कगार पर हैं. डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि पूरे राज्य का होटल उद्योग प्रभावित हुआ है. छात्र, मरीजों के तीमारदार और आम लोग प्रभावित होंगे.
मुंबई और पुणे में हालात बिगड़े
मुंबई में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति पूरी तरह ठप है. रिफिल बुकिंग में 2 से 8 दिन की देरी हो रही है. होटल्स ब्लैक में घरेलू सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो सकते हैं, जो खतरनाक है. पुणे में 18 श्मशान घाटों में एलपीजी इस्तेमाल रुक गया है. म्युनिसिपल कमिश्नर ने कहा कि कमी से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है.
सरकार ने उठाए कदम
सरकार ने रिफाइनरियों से एलपीजी उत्पादन बढ़ाने को कहा है. अतिरिक्त उत्पादन घरेलू उपयोग के लिए जाएगा. रिफिल बुकिंग का अंतर 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है. तीन तेल विपणन कंपनियों के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टरों की कमिटी बनी है, जो होटल-रेस्टोरेंट की मांगों की जांच करेगी. घरेलू गैस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है.
क्या है संकट की मुख्य वजह
भारत सालाना 31.3 मिलियन टन एलपीजी खपत करता है, जिसमें 87 प्रतिशत घरेलू है. 62 प्रतिशत आयात होता है, ज्यादातर सऊदी अरब से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते. संघर्ष से यह रास्ता प्रभावित हुआ है. सरकार रूस और पश्चिम अफ्रीका जैसे विकल्प तलाश रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति लंबी चलेगी तो व्यावसायिक क्षेत्र में बड़ा असर पड़ेगा.