क्या पीएफ का पैसा म्यूचुअल फंड में लगाना सही है? जानें EPFO की चेतावनी
ईपीएफओ के अनुसार पीएफ और म्यूचुअल फंड एक दूसरे के विकल्प नहीं हैं. पीएफ रिटायरमेंट सुरक्षा, पेंशन, बीमा और निश्चित ब्याज देता है, जबकि म्यूचुअल फंड बाजार जोखिम से जुड़ा होता है.
नई दिल्ली: शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में बढ़ते रिटर्न की वजह से बड़ी संख्या में लोग निवेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं. कई निवेशक अधिक कमाई की उम्मीद में अपने कर्मचारी भविष्य निधि यानी पीएफ का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में लगाने की सोचते हैं लेकिन वित्तीय विशेषज्ञ और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ इसे सही रणनीति नहीं मानते.
उनका कहना है कि पीएफ और म्यूचुअल फंड दोनों का उद्देश्य अलग अलग है, इसलिए इनकी तुलना करना या एक को दूसरे का विकल्प मानना ठीक नहीं है. ईपीएफओ के अनुसार पीएफ केवल एक निवेश योजना नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था है.
क्या-क्या होती है सुविधाएं?
यह कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सहारा देने के साथ पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है. इसलिए केवल अधिक रिटर्न के लालच में पीएफ का पैसा निकालना भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को कमजोर कर सकता है.
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वर्तमान में ईपीएफ पर 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है. यह ब्याज सरकार द्वारा तय किया जाता है और इसमें बाजार के उतार चढ़ाव का असर नहीं पड़ता. दूसरी ओर म्यूचुअल फंड पूरी तरह बाजार आधारित निवेश है. इसमें लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है, लेकिन लाभ की कोई गारंटी नहीं होती. बाजार में गिरावट आने पर निवेश की कीमत भी कम हो सकती है.
विशेषज्ञों का क्या है कहना?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रिटायरमेंट के समय बाजार कमजोर रहा और म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, तो निवेशक को नुकसान उठाना पड़ सकता है. जबकि पीएफ में जमा राशि सुरक्षित रहती है और उस पर तय ब्याज मिलता रहता है. यही कारण है कि रिटायरमेंट फंड को जोखिम वाले निवेश में बदलना उचित नहीं माना जाता.
ईपीएफ खाते का और क्या है फायदा?
ईपीएफ खाते का एक और बड़ा फायदा यह है कि इसके माध्यम से कर्मचारी पेंशन योजना का लाभ मिलता है. इसके अलावा कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना के तहत पात्र सदस्यों को सात लाख रुपये तक का बीमा कवर भी मिलता है. साथ ही पीएफ में निवेश पर आयकर नियमों के तहत टैक्स लाभ भी उपलब्ध होता है. ये सभी सुविधाएं म्यूचुअल फंड में नहीं मिलतीं.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि म्यूचुअल फंड में निवेश नहीं करना चाहिए. यदि आपकी आय नियमित है, आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं और बाजार के जोखिम को समझते हैं, तो अपनी अतिरिक्त बचत का एक हिस्सा म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं. इससे लंबी अवधि में बेहतर संपत्ति बनाने का अवसर मिल सकता है.