आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए अच्छी खबर, वित्त वर्ष 2026 में तय सीमा के भीतर रहा राजकोषीय घाटा
डेटा के अनुसार, राजकोषीय घाटा यानी भारत सरकार के राजस्व और खर्चे के बीच का अंतर 15.19 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो कि फरवरी में केंद्रीय बजट समीक्षा में प्रस्तुत वार्षिक लक्ष्य के 97.5 प्रतिशत के बराबर है.
सोमवार को जारी आधिकारिक डेटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहा, जो कि सरकार के संशोधित अनुमान के अनुसार है. डेटा के अनुसार, राजकोषीय घाटा यानी भारत सरकार के राजस्व और खर्चे के बीच का अंतर 15.19 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो कि फरवरी में केंद्रीय बजट समीक्षा में प्रस्तुत वार्षिक लक्ष्य के 97.5 प्रतिशत के बराबर है.
शुद्ध मुनाफा बढ़ा
इसके अलावा, अप्रैल के सरकारी खातों से पता चला है कि वित्त वर्ष 2027 के पहले महीने के लिए राजकोषीय घाटा पूरे साल के बजटीय लक्ष्य का 21.4 प्रतिशत तक पहुंच गया. वित्त वर्ष 2026 के लिए राजस्व संग्रह मजबूत बना रहा. इस साल 33 लाख करोड़ का शुद्ध कर प्राप्त हुआ जबकि पिछले वित्त वर्ष में 30.87 लाख करोड़ का शुद्ध कर प्राप्त हुआ था. गैर-कर राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह पिछले साल 5.31 लाख करोड़ के मुकाबले 6.8 लाख करोड़ दर्ज किया गया.
कितना हुआ सरकारी खर्च
वहीं अगर सरकारी खर्चे की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में सरकार ने 49 लाख करोड़ रुपए खर्चा किया जबकि पिछले वित्त वर्ष में सरकार कार खर्च 47.16 लाख करोड़ रहा था.
विकास कार्यों पर कितना खर्च हुआ
वहीं, बुनियादी ढांचे, आर्थिक विकास और सार्वजनिक निवेश पर खर्चे को बताने वाला प्रमुख इंडीकेटर, पूंजीगत व्यय, पिछले वित्त वर्ष के 10.18 लाख करोड़ की तुलना में इस वर्ष बढ़कर 10.7 लाख करोड़ हो गया. सरकार आर्थिक विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय को बनाए रखते हुए राजकोषीय अनुशासन को बरकरार रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. संशोधित राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने से भारत के राजकोषीय कंसॉलिडेशन रोडमैप में भरोसा बढ़ने की उम्मीद है.