BRICS 2026

भारतीय रिफाइनरी की बढ़ी ताकत, रूस को पेट्रोल सप्लाई में भारत ने रचा नया रिकॉर्ड

भारत-रूस के ऊर्जा कारोबार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने के बाद उसने भारत से रिकॉर्ड मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद खरीदे हैं.

ANI
Shanu Sharma

भारत और रूस के बीच तेल व्यापार की कहानी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है. 2022 से पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बेहद कम थी, लेकिन इसके बाद रूसी तेल की खरीद में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और रूस भारत का प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया. अब तस्वीर का दूसरा पहलू सामने आया है.

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में रूस ने करीब 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए. इसमें भारत से भेजा गया पेट्रोल भी शामिल है. भारत ने अकेले रूस को करीब 1.20 लाख टन पेट्रोल की आपूर्ति की, जिसकी कीमत लगभग 7.8 करोड़ यूरो बताई गई है.

भारत की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में रूस के कुल पेट्रोलियम उत्पाद आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी रही. यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस लंबे समय से दुनिया के बड़े रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों में शामिल रहा है. CREA के मुताबिक, अगस्त में रूस द्वारा आयात किए गए तेल उत्पादों की मात्रा उसके पिछले मासिक रिकॉर्ड से सात गुना से ज्यादा थी. वहीं, पूरे 2025 में आयात की गई मात्रा के मुकाबले यह करीब तीन गुना रही.


भारत से रूस भेजा गया पूरा पेट्रोल गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी में तैयार किया गया था. इस रिफाइनरी का संचालन नायरा एनर्जी करती है, जिसमें रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की करीब 49.13 फीसदी हिस्सेदारी है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के शुरुआती आठ महीनों में वाडिनार रिफाइनरी में इस्तेमाल हुआ पूरा कच्चा तेल रूस से आया. यानी रूस से भेजे गए कच्चे तेल को भारत में रिफाइन कर पेट्रोल तैयार किया गया और फिर वही ईंधन वापस रूस पहुंचाया गया.

यूक्रेनी ड्रोन हमलों से बढ़ी रूस की मुश्किल

रूस में ईंधन की जरूरत बढ़ने की बड़ी वजह यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमले हैं. इन हमलों में रूस की कई तेल रिफाइनरियां और ऊर्जा प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं. इससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल का उत्पादन प्रभावित हुआ और आयात की जरूरत बढ़ गई. भारत के अलावा दक्षिण कोरिया ने अगस्त में रूस को करीब 18 हजार टन तेल उत्पाद भेजे. मिस्र ने भी लगभग 25 हजार टन डीजल की आपूर्ति की. इस तरह भारत और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार में एक दिलचस्प बदलाव सामने आया है. कभी भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार बना था और अब रूस को अपनी घरेलू ईंधन जरूरत पूरी करने के लिए भारत से पेट्रोल मंगाना पड़ रहा है.