भारत का एक्सपोर्ट बढ़ा, फिर भी क्यों बढ़ता गया घाटा? जुलाई में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का झटका
जुलाई 2026 में भारत का माल निर्यात बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुंचा, लेकिन आयात की तेज रफ्तार ने व्यापार घाटे को 31.98 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया. अप्रैल-जुलाई में घाटा 119 अरब डॉलर रहा.
भारत के विदेशी व्यापार के जुलाई आंकड़े राहत और चिंता, दोनों की तस्वीर पेश करते हैं. निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी हुई, लेकिन आयात उससे कहीं तेज बढ़ा. यही वजह है कि देश का व्यापार घाटा जून के मुकाबले और चौड़ा हो गया. अप्रैल से जुलाई के बीच भी यही दबाव बना रहा.
निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटे ने बढ़ाई चिंता
जुलाई में भारत का माल निर्यात करीब 44.24 अरब डॉलर रहा, जो जून के 40.41 अरब डॉलर से लगभग 9.48 प्रतिशत अधिक है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक कारोबार पर भू-राजनीतिक तनाव, महंगी शिपिंग और बदलती व्यापार नीतियों का असर दिखाई दे रहा है. हालांकि निर्यात में मजबूती के बावजूद व्यापार संतुलन बेहतर नहीं हो सका. इसकी सबसे बड़ी वजह आयात में तेज उछाल रही. जुलाई में व्यापार घाटा 31.98 अरब डॉलर रहा, जबकि जून में यह 27.87 अरब डॉलर था. यानी एक महीने में घाटा करीब 4.11 अरब डॉलर बढ़ गया.
आयात की तेज रफ्तार बनी बड़ी वजह
जुलाई में भारत का माल आयात करीब 76.22 अरब डॉलर रहने का अनुमान है. जून में यह आंकड़ा 70.84 अरब डॉलर था. यानी एक महीने में आयात करीब 5.38 अरब डॉलर बढ़ गया. यही बढ़ोतरी निर्यात में हुई वृद्धि पर भारी पड़ गई. अप्रैल में आयात 71.94 अरब डॉलर, मई में 73.41 अरब डॉलर और जून में 70.84 अरब डॉलर रहा था. जुलाई को जोड़ने पर अप्रैल-जुलाई के दौरान कुल माल आयात करीब 292.41 अरब डॉलर बैठता है. इस अवधि में निर्यात 173.41 अरब डॉलर रहा और कुल व्यापार घाटा करीब 119 अरब डॉलर पहुंच गया.
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निर्यात में मजबूती फिर भी राहत की बात
व्यापार घाटे की तस्वीर चिंता बढ़ाती है, लेकिन निर्यात के आंकड़े पूरी तरह निराशाजनक नहीं हैं. अप्रैल से जून के बीच भारत का माल निर्यात 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 111.57 अरब डॉलर था. यानी शुरुआती महीनों में निर्यात की रफ्तार मजबूत रही. जुलाई में भी 44.24 अरब डॉलर का आंकड़ा सामने आया. इससे संकेत मिलता है कि भारतीय उत्पादों की विदेशी मांग बनी हुई है. हालांकि आयात की गति ज्यादा तेज होने से व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ रहा है. ऊर्जा, सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और दूसरी जरूरी वस्तुओं के आयात का असर कुल आयात बिल पर पड़ता है.
रुपये और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
बढ़ता व्यापार घाटा भारत के बाहरी खाते के लिए महत्वपूर्ण है. जब आयात का भुगतान बढ़ता है, तो डॉलर की मांग भी बढ़ सकती है और इसका असर रुपये पर पड़ सकता है. हालांकि सिर्फ व्यापार घाटे के आधार पर रुपये की दिशा तय नहीं होती. सेवाओं का निर्यात, विदेशों से मिलने वाला पैसा, विदेशी निवेश और पूंजी प्रवाह भी तस्वीर को प्रभावित करते हैं. इसलिए जुलाई के आंकड़ों का आकलन केवल घाटे के आधार पर करना सही नहीं होगा. फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है, लेकिन आयात की रफ्तार उससे आगे निकल गई है. यही जुलाई में बढ़े व्यापार घाटे की मुख्य वजह है.