घर का सोना ले जाएगी सरकार? इस प्लान ने बढ़ाई लोगों की टेंशन, जानिए क्या है पूरा सच
भारत में सोने का इम्पोर्ट घटाने के लिए सरकार नया नियम ला सकती है. इसके तहत लोग घरों-मंदिरों का निष्क्रिय सोना बैंक में जमा कर ब्याज कमा सकेंगे और ज्वेलर्स इसे उधार लेकर बिजनेस में इस्तेमाल कर सकेंगे.
नई दिल्ली: भारत में सोना सिर्फ गहना या इन्वेस्टमेंट नहीं है बल्कि हमारी परंपरा और भावनाओं से जुड़ा है. शादियों और त्योहारों पर जमकर सोना खरीदा जाता है. लेकिन यही सोना अब देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव भी बढ़ा रहा है. भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना आयात करने वाले देशों में से एक है जिससे हर साल अरबों डॉलर फोरेन करेंसी खर्च हो जाती है.
इसी समस्या से निपटने के लिए ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को एक बड़ा सुझाव दिया है. संगठन का कहना है कि सरकार को सोने के आयात को रोकने के बजाय देश के भीतर पहले से मौजूद निष्क्रिय सोने का इस्तेमाल करना चाहिए.
क्या है 'बुलियन बैंक' मॉडल?
भारतीय घरों, मंदिरों और गोल्ड ETF में लाखों टन सोना ऐसा पड़ा है जो आर्थिक रूप से किसी काम नहीं आ रहा है. AIJGF ने इसके लिए एक 'बुलियन बैंक' यानी गोल्ड बैंकिंग सिस्टम बनाने का प्रस्ताव रखा है. इस सिस्टम के तहत लोग अपने घरों या लॉकर में रखा सोना बैंक में जमा करा सकेंगे जिस पर उन्हें ब्याज या अन्य वित्तीय लाभ मिलेगा. ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और एक्सपोर्टर्स इस जमा सोने को बैंक से उधार लेकर अपने बिजनेस में इस्तेमाल कर सकेंगे.
वहीं बाजार में घरेलू सोने की सप्लाई बढ़ने से विदेशों से नया सोना नहीं खरीदना पड़ेगा जिससे देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा. इसके अलावा, संगठन ने सुझाव दिया है कि गोल्ड ETFs को भी अपने फिजिकल गोल्ड का कुछ हिस्सा बाजार में उधार देने की छूट मिलनी चाहिए ताकि मार्केट में लिक्विडिटी बनी रहे.
क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से ज्वेलरी इंडस्ट्री को सस्ता और आसानी से सोना मिलेगा जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी. लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा. सबसे बड़ी चुनौती लोगों का भरोसा जीतना है क्योंकि भारतीय परिवार अपने सोने को घर या लॉकर में ही सुरक्षित मानते हैं. इसके लिए सरकार को एक बहुत मजबूत और सुरक्षित नियम रेग्यूलेटरी फ्रेमवर्क बनाना होगा. फिलहाल सरकार ने इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है लेकिन अगर यह मॉडल लागू होता है तो इंडियन इकोनॉमी के लिए यह एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है.