प्राइवेट PF ट्रस्ट वालों के लिए बड़ी राहत! EPFO ने खोला 6 महीने का 'गोल्डन विंडो'

EPFO ने छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट चलाने वाली कंपनियों के लिए 'एमनेस्टी स्कीम 2026' शुरू की है. इसके तहत नियोक्ता पुराने पीएफ विवाद सुलझाकर, कानूनी मुकदमों, ब्याज और जुर्माने से बड़ी राहत पा सकते हैं.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने अपनी खुद की 'छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट' चलाने वाली कंपनियों के लिए 'एमनेस्टी स्कीम 2026' की शुरुआत की है. यह योजना योग्य नियोक्ताओं को अपने पीएफ ट्रस्ट की स्थिति को नियमन के दायरे में लाने, पुराने कानूनी विवादों से बचने और ब्याज व जुर्माने से राहत पाने का एकमुश्त मौका देती है. यह योजना 29 जून, 2026 से अगले छह महीनों के लिए खुली रहेगी.

क्या है ईपीएफओ एमनेस्टी स्कीम?

यह योजना विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए है जिनके पीएफ ट्रस्ट आयकर अधिनियम के तहत तो मान्यता प्राप्त थे, लेकिन उन्हें कभी भी ईपीएफ कानून के तहत केंद्र या राज्य सरकार से औपचारिक छूट का नोटिफिकेशन नहीं मिला था. ऐसे नियोक्ता अब बिना किसी बड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना किए अपनी कमियों को सुधार सकते हैं.

EPFO ने यह कदम क्यों उठाया?

फाइनेंस एक्ट 2026 के जरिए इनकम टैक्स के नियमों को ईपीएफ कानून के दायरे में लाया गया है. इस नए ढांचे के तहत, केवल उन्हीं पीएफ ट्रस्टों को आगे मान्यता मिलेगी जिन्हें ईपीएफ अधिनियम की धारा 17 के तहत आधिकारिक रूप से छूट मिली हुई है. मौजूदा नियोक्ताओं को इन नए नियमों को अपनाने में मदद करने के लिए ही EPFO ने इस राहत योजना की पेशकश की है.


कौन कर सकता है आवेदन?

यह योजना उन नियोक्ताओं के लिए खुली है जो बिना औपचारिक छूट नोटिफिकेशन के मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्ट चला रहे हैं. इसके तहत दो श्रेणियां बनाई गई हैं-

कैटेगरी-1: ऐसे नियोक्ता जो पुरानी तारीख से ट्रस्ट को नियमित कराना चाहते हैं और पहले ही गैर-छूट प्राप्त पीएफ सिस्टम में आ चुके हैं या आने के लिए तैयार हैं.

कैटेगरी-2: ऐसे नियोक्ता जो 'सोशस सिक्योरिटी कोड, 2020' के तहत छूट प्राप्त संस्थान के रूप में बने रहते हुए पुरानी तारीख से ट्रस्ट का नियमन चाहते हैं.

योजना के मुख्य लाभ

योग्यता के आधार पर पीएफ ट्रस्ट को उसकी मूल तारीख से पुरानी मंजूरी मिल सकेगी.

  • लंबित पड़े ब्याज, हर्जाने और जुर्माने की कार्यवाहियों से राहत मिलेगी, बशर्ते कर्मचारियों को उनका तय कानूनी योगदान और ब्याज मिला हो.
  • 'सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020' के तहत कुछ नियमों के पालन में ढील दी जाएगी.
  • योग्य मामलों से जुड़े पुराने प्रतिकूल या खिलाफ आए कानूनी आदेशों को वापस लिया जा सकता है.

कंपनियों को क्या करना होगा?

  • योग्य नियोक्ताओं यानी एमप्लोयर को निम्नलिखित कदम उठाने होंगे-
  • ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से संबंधित सरकार को एक औपचारिक आवेदन देना होगा.
  • यदि जरूरी हो, तो ईमेल के जरिए अपनी रुचि जतानी होगी.
  • आवेदन करने के तीन महीने के भीतर चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑडिट और विशेष अनुपालन ऑडिट पूरा कराना होगा.

 

जरूरी जानकारियां एक नजर में

अहम बातें

यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

यह योजना कंपनियों को अपने लंबे समय से अटके हुए पीएफ मामलों को सुलझाने और नए नियमों के अनुसार खुद को ढालने का एक बेहतरीन मौका देती है. इससे काम में पारदर्शिता आएगी, अदालती मामले कम होंगे और नियमों का पालन करना आसान हो जाएगा. चूंकि यह मौका सिर्फ छह महीनों के लिए उपलब्ध है, इसलिए योग्य संस्थानों को बिना देर किए अपने आवेदन और ऑडिट पूरे कर लेने चाहिए.