'F1 कारों में भी चलता है E20 एथेनॉल पेट्रोल', विवाद के बीच सरकार के समर्थन में उतरे ऑटो एक्सपर्ट्स
E20 एथेनॉल पेट्रोल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सरकार का समर्थन किया. उनका कहना है कि व्यापक परीक्षणों में ईंधन सुरक्षित पाया गया और इससे वाहनों को नुकसान होने के प्रमाण नहीं मिले.
देश में E20 एथेनॉल पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति का खुलकर समर्थन किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि E20 ईंधन को लागू करने से पहले वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण किए गए और इसके बाद ही इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया. उनका दावा है कि अब तक किसी भी अध्ययन में यह साबित नहीं हुआ कि E20 पेट्रोल से वाहनों को गंभीर नुकसान पहुंचता है या इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
विशेषज्ञ बोले- वर्षों की तैयारी के बाद लागू हुआ E20
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड प्रमुख वर्तिका शुक्ला, टोयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुजुकी, हुंडई, टीवीएस, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प सहित कई कंपनियों के प्रतिनिधियों ने E20 कार्यक्रम का समर्थन किया. वर्तिका शुक्ला ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कोई जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं था. भारत ने दिसंबर 2025 में E20 लक्ष्य हासिल किया और इससे पहले ऑटो उद्योग ने व्यापक परीक्षण किए. उनके अनुसार E20 ईंधन भारत स्टेज-6 मानकों के अनुरूप है और कनाडा तथा पैराग्वे जैसे कई देशों में भी इसका उपयोग पहले से हो रहा है.
'फॉर्मूला-1 कारों में भी होता है एथेनॉल का इस्तेमाल'
टोयोटा किर्लोस्कर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी ने कहा कि एथेनॉल एक प्रभावी और स्वच्छ ईंधन है. उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर की कई कारें भी एथेनॉल आधारित ईंधन पर चलती थीं और आज फॉर्मूला-1 रेसिंग कारों में भी एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है. उनके मुताबिक इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और कच्चे तेल पर निर्भरता घटती है. उन्होंने हालिया पश्चिम एशिया संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है.
Also Read
पुरानी गाड़ियों को लेकर उठे सवालों पर क्या बोले उद्योग
मारुति सुजुकी के वरिष्ठ अधिकारी राहुल भारती ने माना कि 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि अब तक के परीक्षणों में E20 पेट्रोल से जुड़ी कोई गंभीर तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है. पूर्व इंडियन ऑयल चेयरमैन बी. अशोक ने भी कहा कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है, किसानों की आय बढ़ी है और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिली है. उनके अनुसार इंजन खराब होने या माइलेज में भारी गिरावट जैसी कई आशंकाओं के समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं.
सरकार ने भी अफवाहों पर दिया जवाब
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैल रहे कई दावों का खंडन करते हुए कहा कि E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययनों, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नियामकीय मानकों पर आधारित है. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल उत्पादन में पानी की अत्यधिक खपत संबंधी दावे सही नहीं हैं. हालांकि E20 को लेकर बहस अभी भी जारी है. हाल ही में भूटान ने भी भारत से E20 पेट्रोल लेने के बजाय सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखने का अनुरोध किया, लेकिन उसकी वजह E20 ईंधन नहीं बल्कि वहां की पुरानी ईंधन भंडारण व्यवस्था बताई गई.