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'8-9 घंटे से ज्यादा काम करके..' 90 घंटे काम पर सीरम इंस्टीट्यूट के CEO अदार पूनावाला की दो टूक

अदार पूनावाला ने कड़ी मेहनत के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा, “कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है," लेकिन यह भी जोर दिया कि काम को स्मार्ट तरीके से करना उतना ही महत्वपूर्ण है.

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Edited By: Mayank Tiwari
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला
Courtesy: Social Media

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ, अदार पूनावाला ने हाल ही में वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम (WEF) 2025 के दौरान कार्य-जीवन संतुलन पर चल रही बहस में अपनी राय व्यक्त की है. इस दौरान पूनावाला ने कहा कि इंसान एक दिन में 8 या 9 घंटे से ज्यादा काम करके प्रोडक्टविटी नहीं दे सकता. कभी-कभी आपको इतने घंटे (सप्ताह में 70 या 90 घंटे) काम करना पड़ता है. यह ठीक है. मैं ऐसा करता हूं. मेरे कर्मचारी ऐसा करते हैं, लेकिन आप ऐसा हर दिन नहीं कर सकते.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अपने काम के शेड्यूल पर चर्चा करते हुए अदार पूनावाला ने कहा, "मैं कहूंगा कि मैं दिन में कम से कम 8 घंटे काम करता हूं, कभी-कभी वीकेंड पर भी अगर ज़रूरत हो, लेकिन कुछ दिन ऐसे भी हो सकते हैं जब मैं ढलान पर स्कीइंग कर रहा होता हूं या कुछ और कर रहा होता हूं. लेकिन, यह सब दिन पर निर्भर करता है.

आपको कड़ी मेहनत करनी चाहिए- पूनावाला

वहीं, पूनावाला ने माना कि कुछ ऐसे समय होते हैं जब लंबे घंटे काम करना जरूरी हो सकता है, लेकिन यह हर दिन के लिए स्थायी नहीं हो सकता. उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने अनुभव को याद करते हुए कहा, “मैं 16 घंटे का दिन बिता सकता था. कोविड के दौरान मैं रात 11 बजे घर लौटता था. यह सब इस पर निर्भर करता है कि आप किस यात्रा पर हैं और आप जिस स्टेज पर हैं. अगर आप एक उद्यमी हैं और अपना व्यवसाय बना रहे हैं, तो आपको कड़ी मेहनत करनी चाहिए और जो कुछ भी जरूरी हो, वह करना चाहिए.

कड़ी मेहनत और स्मार्ट काम दोनों की अहमियत

अदार पूनावाला ने कड़ी मेहनत के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा, “कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है," लेकिन यह भी जोर दिया कि काम को स्मार्ट तरीके से करना उतना ही महत्वपूर्ण है.

लार्सन एंड टुब्रो और इंफोसिस चीफ ने क्या बोला?

हाल ही में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के चेयरमैन एस एन सुब्रहमण्यम ने कर्मचारियों से 90 घंटे काम करने की अपील की थी. उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों को अपने घर-परिवार के जीवन से ज्यादा काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. इसी तरह, इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने भी 70 घंटे काम करने का समर्थन किया था, और यह सुझाव दिया कि भारत को चीन और जापान जैसे तेजी से बढ़ते देशों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए युवाओं को इस स्तर पर काम करना होगा.

हालांकि, सोमवार को मूर्ति ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी से लंबे घंटे काम करने को नहीं कह सकता, लेकिन यह सब पर निर्भर है कि वे इसे समझें और आंतरिक रूप से इसे स्वीकार करें. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने इंफोसिस के दिनों में 40 सालों तक 70 घंटे से ज्यादा काम किया और यह विषय बहस का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का है.