क्यों बदल रही है कार इंडस्ट्री की सोच? टचस्क्रीन से वापस बटन की ओर, यहां जानें
दुनिया भर में कारों का इंटीरियर एक बार फिर बदल रहा है. जहां भारत में फुल टचस्क्रीन कंट्रोल का चलन बढ़ रहा है, वहीं विदेशी बाजारों में कार कंपनियां फिजिकल बटन और नॉब्स की वापसी कर रही हैं.
नई दिल्ली: पिछले दशक में कारों के डैशबोर्ड पर टचस्क्रीन का दबदबा बढ़ा, लेकिन अब यही ट्रेंड विदेशों में उलट रहा है. Volkswagen, Hyundai और Mercedes-Benz जैसी कंपनियां 2025–26 तक फिजिकल बटन वापस ला रही हैं. वजह है ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा, Euro NCAP के सख्त नियम, ग्राहकों की शिकायतें और टचस्क्रीन की ज्यादा रिपेयर लागत.
कारों के इंटीरियर में पिछले कुछ सालों में बड़ा बदलाव देखने को मिला. बटन और नॉब्स की जगह बड़ी टचस्क्रीन ने ले ली, जिसे प्रीमियम और मॉडर्न माना गया. लेकिन अब यही बदलाव सवालों के घेरे में है. विदेशों में कई कार निर्माता फिर से पुराने फिजिकल कंट्रोल्स की ओर लौट रहे हैं, जबकि भारत में अब भी टचस्क्रीन को भविष्य माना जा रहा है.
ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा बनी बड़ी वजह
टचस्क्रीन देखने में आकर्षक जरूर है, लेकिन ड्राइविंग के समय यह ध्यान भटकाती है. एसी, वॉल्यूम या वाइपर जैसे छोटे कामों के लिए भी सड़क से नजर हटानी पड़ती है. इसके उलट फिजिकल बटन मसल मेमोरी पर काम करते हैं और बिना देखे इस्तेमाल हो जाते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ सेकेंड का भी ध्यान भटकना हादसे का खतरा बढ़ा देता है.
सख्त हो रहे हैं यूरोपीय सेफ्टी नियम
Euro NCAP ने साफ कर दिया है कि 2026 से सेफ्टी रेटिंग और कड़ी होगी. अगर इंडिकेटर, वाइपर, हॉर्न या इमरजेंसी फंक्शन सिर्फ टचस्क्रीन से चलते हैं, तो 5-स्टार रेटिंग नहीं मिलेगी. इसी डर से कंपनियां इंटीरियर डिजाइन बदल रही हैं और जरूरी कंट्रोल्स को फिजिकल बना रही हैं.
ग्राहकों का अनुभव बदला सोच
शुरुआत में टचस्क्रीन लोगों को पसंद आई, लेकिन लंबे इस्तेमाल के बाद शिकायतें बढ़ीं. उबड़-खाबड़ सड़कों पर स्क्रीन टैप करना मुश्किल होता है. बार-बार मेन्यू में जाना झुंझलाहट पैदा करता है. ग्राहकों का मानना है कि साधारण बटन ज्यादा सहज और भरोसेमंद होते हैं, जिसे कंपनियां अब गंभीरता से ले रही हैं.
बढ़ती रिपेयर लागत भी चिंता
टचस्क्रीन खराब होने पर उसका रिपेयर या रिप्लेसमेंट काफी महंगा पड़ता है. सॉफ्टवेयर की दिक्कतें भी परेशानी बढ़ाती हैं. वहीं फिजिकल बटन सस्ते, टिकाऊ और जल्दी बदले जा सकते हैं. कंपनियां समझ रही हैं कि कार को पूरे ओनरशिप पीरियड में किफायती रखना जरूरी है.
आने वाले समय में कैसा होगा कार इंटीरियर
ऑटो एक्सपर्ट्स के मुताबिक भविष्य की कारें संतुलन का रास्ता अपनाएंगी. नेविगेशन और एंटरटेनमेंट के लिए बड़ी टचस्क्रीन रहेगी, लेकिन ड्राइविंग से जुड़े जरूरी कंट्रोल फिजिकल होंगे. यानी टेक्नोलॉजी रहेगी, लेकिन वहां जहां वह सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ाए.
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