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इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले हो रही है चार्जिंग की टेंशन? यहां जानें एक घंटे में कितना आता है खर्च

इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग लागत घरेलू और पब्लिक फास्ट चार्जर पर काफी अलग होती है. घर पर 7.2 kW एसी चार्जर से एक घंटे में 7-8 यूनिट बिजली लगती है, जिसका खर्च 50 रुपये के आसपास रहता है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक कार खरीदने के बाद सबसे बड़ी चिंता चार्जिंग की होती है-कहां करें और कितना खर्च आएगा? आज बाजार में ज्यादातर ईवी मॉडल फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं, जिससे डीसी स्टेशन पर मिनटों में चार्ज हो जाता है, लेकिन खर्च बढ़ जाता है. वहीं घर पर एसी चार्जर से धीरे-धीरे चार्ज करने पर समय ज्यादा लगता है, मगर बिजली बिल कम आता है. यह फैसला आपकी दिनचर्या, बजट और उपलब्धता पर निर्भर करता है. आइए विस्तार से समझते हैं कि एक घंटे की चार्जिंग में दोनों जगह कितना असर पड़ता है.

घर पर चार्जिंग: सस्ता लेकिन समय लगता है

घरेलू चार्जिंग सबसे किफायती विकल्प है. अगर आप 7.2 kW वाले वॉल-बॉक्स या सामान्य 15 एम्पियर सॉकेट इस्तेमाल करते हैं, तो एक घंटे में करीब 7-8 यूनिट बिजली खपत होती है. देश के ज्यादातर हिस्सों में घरेलू बिजली दर 6-8 रुपये प्रति यूनिट है, इसलिए एक घंटे का खर्च महज 45-60 रुपये रहता है. इससे आप रात भर चार्ज करके सुबह पूरी बैटरी के साथ निकल सकते हैं, बिना किसी अतिरिक्त झंझट के.

फास्ट चार्जिंग: स्पीड के लिए ज्यादा पैसे

पब्लिक डीसी फास्ट चार्जर (50 kW या उससे ज्यादा) पर एक घंटे में 40-50 यूनिट तक बिजली लग सकती है. यहां बिजली महंगी होने के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस चार्ज भी जुड़ते हैं, इसलिए जीएसटी मिलाकर 600-800 रुपये तक का बिल आ सकता है. फायदा यह है कि कार 60-70 फीसदी तक चार्ज हो जाती है, यानी 200-300 किमी की रेंज मिल जाती है. हाईवे यात्रा या जल्दी निकलने के लिए यह बेहतरीन है.

बैटरी साइज का असर खर्च पर

कार की बैटरी जितनी बड़ी, उतनी ज्यादा बिजली खपत. जैसे टाटा टियागो ईवी या एमजी कॉमेट (30 kWh बैटरी) में फास्ट चार्जर से भी एक घंटे में 30 यूनिट से ज्यादा नहीं लगती. बड़ी बैटरी वाली कारों में खर्च बढ़ता है. घर पर चार्ज करने से बचत ज्यादा होती है, लेकिन फास्ट चार्जिंग से समय की बचत और लंबी यात्रा आसान हो जाती है.

फायदे-नुकसान और सरकारी सहूलियत

घरेलू चार्जिंग में पैसे कम लगते हैं मगर घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि फास्ट चार्जिंग महंगी है लेकिन मिनटों में काम हो जाता है. कुछ राज्यों में सरकारें ईवी को बढ़ावा देने के लिए कम दरें दे रही हैं या सब्सिडी दे रही हैं, जिससे कुल खर्च और कम हो सकता है. लंबे समय में घरेलू चार्जिंग ही सबसे समझदारी भरा विकल्प साबित होता है.