CNG किट लगवाकर बचा रहे हैं पेट्रोल का खर्च? एक गलती पड़ सकती है भारी, जान लें क्या

पुरानी पेट्रोल कार को कम खर्च में चलाने के लिए आफ्टरमार्केट CNG किट लगवाना आकर्षक विकल्प लग सकता है इससे माइलेज बेहतर करने और ईंधन खर्च घटाने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ जरूरी नियम भी जुड़े हैं.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच कार का खर्च कम करने के लिए कई लोग आफ्टरमार्केट CNG किट का सहारा ले रहे हैं. खासकर पुरानी पेट्रोल कारों के मालिकों के लिए यह विकल्प काफी आकर्षक नजर आता है. जिन मॉडल में कंपनी की ओर से CNG वर्जन नहीं मिलता, उनमें भी किट लगवाकर ईंधन का खर्च घटाने की कोशिश की जाती है. हालांकि, यह फैसला लेने से पहले वारंटी और इंश्योरेंस से जुड़े नियम समझना जरूरी है.

आफ्टरमार्केट CNG किट का खर्च कई मामलों में फैक्ट्री फिटेड CNG कार के पेट्रोल वर्जन की तुलना में मिलने वाले अतिरिक्त प्रीमियम से 25 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है. यही वजह है कि लोग पुरानी या सेकेंड हैंड पेट्रोल कारों में भी इसे लगवाने का विकल्प चुनते हैं. हालांकि, हर कार CNG में बदलने के लिए उपयुक्त नहीं होती. सामान्य तौर पर पेट्रोल कारों को ही आफ्टरमार्केट CNG किट के जरिए कन्वर्ट किया जाता है.

वारंटी का क्या होगा?

CNG किट लगवाने से पहले कंपनी की वारंटी को लेकर सावधानी जरूरी है. सरकार से अप्रूव्ड किट और अधिकृत इंस्टॉलर होने के बावजूद आफ्टरमार्केट CNG किट लगाने से कार की पावरट्रेन वारंटी खत्म हो सकती है. कुछ कंपनियां इंजन से अलग हिस्सों पर वारंटी जारी रख सकती हैं, लेकिन यह कंपनी की शर्तों पर निर्भर करता है. कुछ इंस्टॉलर अलग से थर्ड पार्टी वारंटी भी देते हैं. आमतौर पर CNG किट पर 1 2 साल की वारंटी मिल सकती है.

डिक्की की जगह भी हो सकती है कम

आफ्टरमार्केट CNG किट का असर सिर्फ वारंटी तक सीमित नहीं रहता. किट के साथ लगाए जाने वाले बड़े सिंगल टैंक की वजह से कार की डिक्की की काफी जगह कम हो सकती है. इसके उलट फैक्ट्री फिटेड CNG कारों में कंपनियां अंडरबॉडी या डुअल टैंक जैसे विकल्प देती हैं, जिससे बूट स्पेस को बचाने की कोशिश की जाती है. इसलिए CNG किट लगवाने से पहले कार के इस्तेमाल और सामान रखने की जरूरत को भी ध्यान में रखना चाहिए.

इंश्योरेंस कंपनी को जानकारी देना जरूरी

बाहर से CNG किट लगवाने पर इंश्योरेंस पॉलिसी में भी बदलाव जरूरी होता है. किट की कीमत कार की कुल कीमत में जुड़ने से इंश्योर्ड डिक्लेर्ड वैल्यू यानी IDV बढ़ सकती है. इसके साथ आग लगने का जोखिम भी थोड़ा बढ़ सकता है, इसलिए प्रीमियम में बदलाव हो सकता है. किट लगने के बाद इंश्योरेंस कंपनी को इसकी जानकारी देकर पॉलिसी में CNG किट और उसकी कीमत अपडेट करानी चाहिए.

RC में अपडेट नहीं कराया तो बढ़ेगी परेशानी

CNG किट लगवाने के बाद RTO में कार की RC पर भी CNG की जानकारी अपडेट कराना जरूरी है. अगर किट की जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को नहीं दी गई और RC में भी बदलाव नहीं कराया गया, तो भविष्य में इंश्योरेंस क्लेम को लेकर परेशानी हो सकती है. खासकर दुर्घटना या आग से हुए नुकसान के मामलों में क्लेम खारिज होने का जोखिम रहता है. इसलिए कम खर्च के लिए CNG किट लगवाने से पहले सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करना बेहतर है.