मथुरा और गोकुल में आखिर क्यों अलग-अलग दिन मनाई जाती है जन्माष्टमी? जानें वजह
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान के मध्यरात्रि में जन्म लेने की धार्मिक मान्यता के कारण रात में मनाई जाती है. 2026 में मथुरा में 4 सितंबर और गोकुल में 5 सितंबर को उत्सव मनाने की बात कही गई है.
नई दिल्ली: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है. देशभर में जन्माष्टमी की धूम रहती है, लेकिन ब्रजभूमि में इसका अलग ही महत्व है.
खास बात यह है कि मथुरा में जन्माष्टमी आधी रात को मनाई जाती है, जबकि गोकुल में अगले दिन नंदोत्सव के रूप में उत्सव मनाया जाता है. इसके पीछे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और नंद बाबा के घर पहुंचने से जुडी धार्मिक मान्यता बताई जाती है.
मथुरा में कब मनाया जाता है जन्मोत्सव?
मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. इसी कारण मथुरा में जन्माष्टमी का मुख्य आयोजन मध्यरात्रि में होता है.
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में आधी रात के समय विशेष पूजा और अभिषेक किया जाता है. भगवान का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से महाभिषेक किया जाता है. शंख और घंटों की ध्वनि के बीच भक्त भगवान के जन्म का स्वागत करते हैं. मंदिरों में जयकारे गूंजते हैं और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है.
गोकुल में अगले दिन क्यों मनाया जाता है उत्सव?
धार्मिक कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के जन्म के बाद वसुदेव उन्हें लेकर गोकुल पहुंचे थे. वहां उन्होंने बाल कृष्ण को नंद बाबा और यशोदा मैया के पास पहुंचाया. सुबह जब गोकुलवासियों को नंद बाबा के घर बालक के जन्म की जानकारी मिली तो पूरे गोकुल में खुशी छा गई.
इसी खुशी की याद में गोकुल में अगले दिन नंदोत्सव मनाने की परंपरा है. इस दौरान लोग ढोल नगाडों के साथ उत्सव मनाते हैं और भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण करते हैं. घरों और मंदिरों में मिठाइयां बांटी जाती हैं और श्रद्धालु भक्ति में डूब जाते हैं.
जन्म और खुशखबरी का अलग अलग उत्सव
मथुरा का उत्सव भगवान के जन्म के उस पावन क्षण से जुडा है, जब मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण ने कंस के कारागार में जन्म लिया था. वहीं गोकुल का नंदोत्सव उस खुशी का प्रतीक माना जाता है, जब नंद बाबा और गोकुलवासियों को बाल कृष्ण के आने की खबर मिली.
इसी वजह से ब्रज में जन्माष्टमी का उत्सव दो अलग रंगों में दिखाई देता है. मथुरा में आधी रात को जन्मोत्सव की भव्यता देखने को मिलती है, जबकि गोकुल में अगले दिन सुबह नंदोत्सव की खुशियां मनाई जाती हैं.
2026 में कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी?
वर्ष 2026 में मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाए जाने की बात कही गई है. वहीं गोकुल में अगले दिन 5 सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा. हालांकि स्थानीय मंदिरों और पंचांग के अनुसार आयोजन के समय में अंतर हो सकता है.
ब्रज की यह परंपरा भगवान कृष्ण के जन्म, उनके गोकुल पहुंचने और नंद बाबा के घर आई खुशियों की कथा को जीवंत करती है. इसी कारण मथुरा और गोकुल में होने वाले उत्सवों का अपना अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है.