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राम-लक्ष्मण से जुड़ा है हेमकुंड साहिब का अतीत, रहस्यमयी है स्थान, समझिए अचानक क्यों बढ़ने लगी भीड़

Hemkund Sahib Yatra 2024: सिख धर्म के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस स्थान का संबंध रामायण काल से भी है. इस स्थान पर आज भी लक्ष्मण मंदिर स्थित है. 

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India Daily Live

Hemkund Sahib Yatra 2024: उत्तराखंड के चमोली में स्थित हेमकुंड साहिब के कपाट बीते शनिवार को पंच प्यारों की अगुवाई में खोल दिए गए हैं. विश्व में सबसे ऊंचाई पर स्थित इस गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं के जत्थे ने दर्शन भी किया है. श्री हेमकुंड साहिब सिखों के 10वें गुरु श्रीगुरु गोबिंद सिंह की तपस्थली है. 15000 फीट की ऊंचााई पर स्थिति इस गुरुद्वारे का ऐतिहासिक धार्मिक महत्व है. गुरु गोविंद सिंह रचित दसम ग्रंथ में इसका उल्लेख किया गया है. यहां रोजाना 3500 श्रद्धालुओं को जाने की इजाजत दी गई है. हेमकुंड साहिब ट्रस्ट ने हेमकुंड गुरुद्वारा परिसर में रील्स न बनाने के अपील भी की है.

हेमकुंड साहिब सिखों के 10वें गुरु श्रीगुरु गोविंद सिंह की तपस्थली है. वहीं, इस कुंड का संबंध भगवान लक्ष्मण से भी जुड़ा हुआ है. यहां आज भी भगवान लक्ष्मण का मंदिर है. हेमकुंड साहिब स्थित लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी भक्तों के लिए खुल गए हैं. इस मंदिर को लक्ष्मण लोकपाल मंदिर कहते हैं. गुरुद्वारे और मंदिर के दर्शन के लिए यहां पर भीड़ उमड़ने लगी है.

लक्ष्मण ने किया था तप

पौराणिक मान्यता के अनुसार, हेमकुंड झील के तट पर लक्ष्मण मंदिर बना हुआ है. मान्यता है कि यह मंदिर ठीक उसी जगह पर स्थित है, जहां रावण के बेटे मेघनाद को मारने के बाद भगवान राम के भाई लक्ष्मण ने अपनी शक्ति वापस पाने के लिए तप किया था. वहीं, एक अन्य मान्यता के अनुसार इस मंदिरम में शेषनाग ने तपस्या की थी. जो त्रेतायुग में राजा दशरथ के घर लक्ष्मण रूप में जन्मे थे. इस मंदिर में  भ्यूंडार गांव के लोग अभी भी पूजन करते हैं. यह मंदिर हेमकुंड साहिब के परिसर में ही है. यहां आने वाला हर कोई इस जगह पर मत्था टेकना नहीं भूलता है. 

1934 में हुई थी इस तीर्थस्थल की खोज

क्षेत्र के इतिहासकार और पूर्व मंत्री केदार सिंह फोनिया की डिवाइन हेरिटेज ऑफ हेमकुंड साहिब एंड वर्ल्ड हेरिटेज ऑफ वैली ऑफ फ्लॉवर किताब के अनुसार 1930 के दशक में पत्रकार तारा सिंह नरोत्तम बद्रीनाथ यात्रा पर आए थे. उन्होंने पांडुकेश्वर से यहां जाकर इसकी खोज की और अपने लेख के माध्यम से पंजाब के निवासियों को इसकी जानकारी दी थी.

Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.