एक नहीं हैं भगवान बुद्ध और गौतम बुद्ध, जान लें क्या है दोनों में अंतर?

Buddha Purnima 2024: साल 2024 में वैशाख माह की पूर्णिमा 23 मई को है. वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. भगवान बुद्ध, भगवान विष्णु के नौवें अवतार हैं. वहीं, कुछ लोग गौतम बुद्ध और भगवान बुद्ध को एक समझने की गलती कर देते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग हैं. 

pexels
India Daily Live

Buddha Purnima 2024: वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था. इस कारण इसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. साल 2024 में 23 मई को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा. भगवान बुद्ध को श्रीहरिविष्णु का नौंवा अवतार माना जाता है. वहीं, कुछ लोग बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती व गौतम बुद्ध व भगवान बुद्ध को एक ही मान लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है. भगवान बुद्ध और गौतम बुद्ध पूरी तरह से अलग-अलग हैं. 

भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म आज से 5000 साल पहले हुआ था. जब दैत्यों का आतंक काफी अधिक बढ़ गया था. दैत्य यज्ञ करके खुद को काफी शक्तिशाली बनना चाहते थे. इससे देवताओं को भी डर लगने लगा कि दैत्य अगर बलशाली हो जाएंगे तो पूरे संसार में अधर्म बढ़ जाएगा. इसको रोकने के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु की शरण ली. 

भगवान विष्णु ने लिया अवतार

दैत्यों से सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने भगवान बुद्ध का रूप धारण किया था. उनके हाथ में मर्जनी थी और वे रास्ते को साफ करते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे. जब वे दैत्यों के पास पहुंचे तो भगवान बुद्ध ने उनसे कहा कि ये यज्ञ करना उचित नहीं है, इससे जीवों को नुकसान होता है. जीवहिंसा रोकने के लिए के लिए मैं स्वयं रास्ते को साफ करते हुए चल रहा हूं. 

दैत्यों पर पड़ा भगवान की बात का असर

भगवान बुद्ध की बात का दैत्यों पर असर पड़ा. उन्होंने यज्ञ करना बंद कर दिया. कुछ दिनों बाद असुरों की शक्ति कम हुई तो देवताओं का स्वर्ग पर फिर से आधिपत्य हो गया. जीव हिंसा को रोकने के लिए ही भगवान विष्णु ने भगवान बुद्ध का अवतार लिया था. 

गौतम बुद्ध से जुड़ा है संयोग

ललित विस्तार ग्रंथ के 21वें अध्याय के 178 पृषठ पर यह साफ तरीके से बताया गया है कि यह मात्र एक संयोग था कि जहां पर गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था, वहां पर भगवान बुद्ध ने तपस्या की लीला रचाई थी. हालांकि बौद्ध धर्म को मानने भी गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार नहीं मानते हैं. गौतम बुद्ध का जन्म 477 बीसी में हुआ था. इनके इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था. इनकी माता मायादेवी और पिता शुद्धोदन थे. वहीं, भगवान बुद्ध की माता का नाम अंजना और पिता का नाम हेमसदन था.

भगवान बुद्ध और गौतम बुद्ध दोनों का गोत्र गौतम था. इस कारण भी लोगों को दोनों एक ही लगते हैं. वहीं भगवान बुद्ध को लंबकर्ण भी कहा जाता है. इसका अर्थ बड़े-बड़े कान वाला होता है. इसके बाद से ही भगवान बुद्ध और लंबी-लंबी प्रतिमाएं बनाई जाती थीं. 

 

Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.