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'स्वार्थ की गंध न हो...', प्रेमानंद महाराज ने राकेश टिकैत को दे डाला ज्ञान

Saint Premanand: वृंदावन के संत स्वामी प्रेमानंद महाराज से वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. अब उनका एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें में किसान नेता राकेश टिकैत को नसीहत देते दिख रहे हैं. किसान नेता राकेश टिकैत स्वामी प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए आए थे. 

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Saint Premanand: वृंदावन के संत और राधारानी के अनन्य भक्त स्वामी प्रेमानंद महाराज से अक्सर बड़ी-बड़ी हस्तियां आशीर्वाद लेने आती हैं. उनकी कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं, इन वीडियों में संत प्रेमानंद महाराज लोगों को आध्यात्म की शिक्षा देते हैं. इसके साथ ही वे जीवन से जुड़ी समस्याओं को हल भी बड़ी सरलता से बता देते हैं. अभी संत प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियों में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत दिखाई दे रहे हैं. वे संत प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लेने आए हैं. 

संत प्रेमानंद महाराज भी राकेश टिकैत को वीडियो में नसीहत देते नजर आ रहे हैं. इसमें वे राकेश टिकैत को किसानों को हित में बिना किसी स्वार्थ के काम करने के लिए कह रहे हैं. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. प्रेमानंद महाराज ने राकेश टिकैत से कहा कि किसान बहुत ही भोले हैं. हम किसान के घर में पैदा हुए हैं, इस कारण हमें सबकुछ पता है. किसानों के पक्ष में खड़ा होना और उन्हें सरकार से सुविधाएं प्राप्त कराना काफी अच्छा काम है,लेकिन इसमें आपका स्वार्थ नहीं होना चाहिए. 

किसान त्याग देते हैं शरीर

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अगर फसल नष्ट हो जाती है तो किसान नष्ट हो जाता है. वो मेहनत से अपनी फसल तैयार करता और उसे कई बार प्राकृतिक व अन्य प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि दूसरों के कल्याण के समान कोई धर्म नहीं है, लेकिन दूसरों के दुख के समान कोई पाप नहीं है. परोपकार की भावना से सभी को एक साथ खड़े होकर किसानों की समस्याओं में उनकी सहायता करनी चाहिए क्योंकि किसान अपनी असमर्थता के कारण शरीर त्याग देते हैं मतलब आत्महत्या कर लेत हैं. उनकी मदद के लिए कोई हाथ आगे नहीं आता है. उनकी कोई नहीं सुनता है. 

आध्यात्मिक चर्चा के बाद दिया आशीर्वाद 

राधा केली कुंज आश्रम में आध्यात्मकि चर्चा के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने किसान नेता द्वारा किसानों की समस्या के लिए संघर्ष कर सरकार से लाभ दिलाने को उत्तम कार्य बताया. उन्होंने कहा कि इस कार्य में स्वार्थ की भावना नहीं होनी चाहिए. दूसरों के दुख दर्द से लड़ना श्रेष्ठ कर्म है, लेकिन इसमें स्वार्थ नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के किसानों की समस्या के लिए मिलजुलकर काम करें, यही आशीर्वाद है.